गयाजी में ‘ज्ञान भारतम’ मिशन की शुरुआत, प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण के लिए प्रशासन की अपील

0
1776102801504.jpg
Share with

आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 13 अप्रैल 2026,

गयाजी: जिला प्रशासन द्वारा केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘ज्ञान भारतम’ मिशन के तहत जिले की प्राचीन पांडुलिपियों के संकलन और डिजिटलीकरण का विशेष अभियान शुरू किया गया है। इस संबंध में जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने नागरिकों, धार्मिक संस्थाओं और प्रबुद्ध वर्ग से सहयोग की अपील की है।

डीएम ने किया पुस्तकालय का निरीक्षण

जिला पदाधिकारी ने समाहरणालय स्थित पुस्तकालय का निरीक्षण कर वहां रखी प्राचीन एवं विभिन्न भाषाओं की पुस्तकों का अवलोकन किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को स्कैन कर भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड किया जाए, ताकि इन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा सके।

क्या है ‘ज्ञान भारतम’ मिशन

‘ज्ञान भारतम’ मिशन का उद्देश्य भारत की बौद्धिक विरासत को संरक्षित करना है। इसके तहत ताड़पत्र, भोजपत्र, कपड़े और पुराने कागजों पर लिखी पांडुलिपियों को आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा। इन दस्तावेजों में प्राचीन ज्ञान, साहित्य, आयुर्वेद, खगोल विज्ञान और क्षेत्रीय इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी निहित है।

धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष फोकस

प्रशासन द्वारा जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों जैसे विष्णुपद मंदिर, मंगला गौरी मंदिर , महाबोधि मंदिर सहित अन्य मंदिरों, मठों और मस्जिदों में उपलब्ध पांडुलिपियों के संकलन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा टिकारी राज जैसे ऐतिहासिक घरानों और पुराने पुस्तकालयों से भी दस्तावेज जुटाए जाएंगे।

Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

जनभागीदारी पर जोर

मिशन की सफलता के लिए जनभागीदारी को अहम माना गया है। सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पंचायत स्तर पर बैठक कर ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद प्राचीन दस्तावेजों की जानकारी एकत्र करें।

जिला पदाधिकारी की अपील

जिला पदाधिकारी ने कहा कि “हमारी पांडुलिपियां हमारे गौरवशाली अतीत की पहचान हैं। इन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित करना समय की आवश्यकता है।” उन्होंने लोगों से अपील की कि 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी पांडुलिपियां प्रशासन के साथ साझा करें या ‘ज्ञान भारतम’ मोबाइल ऐप के माध्यम से अपलोड करें।

योगदानकर्ताओं को मिलेगा सम्मान

इस अभियान में सहयोग करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं को जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित किया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पांडुलिपियों का स्वामित्व मूल मालिकों के पास ही रहेगा, प्रशासन केवल उनका डिजिटलीकरण करेगा।

अधिकारियों ने किया स्थलों का दौरा

मिशन के तहत विभिन्न अधिकारियों द्वारा पुस्तकालयों और संस्थानों का निरीक्षण भी किया गया। मनु लाल पुस्तकालय मुरारपुर, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया मठ और प्रमंडलीय पुस्तकालय सहित कई स्थानों पर प्राचीन दस्तावेजों का अवलोकन किया गया। यह पहल गयाजी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

You cannot copy content of this page