डेयरी फार्मिंग से आय बढ़ाने के लिए 5 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, किसानों और महिलाओं को मिलेगा वैज्ञानिक मार्गदर्शन

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 01 जून 2026,

गयाजी: कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), गयाजी द्वारा किसानों, ग्रामीण युवाओं एवं महिलाओं को स्वरोजगार और आय वृद्धि के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से “डेयरी फार्मिंग से आय सृजन” विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह प्रशिक्षण 1 जून से 5 जून 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

डेयरी व्यवसाय को बताया ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़

कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान ई. मनोज कुमार राय ने किया। उन्होंने कहा कि डेयरी व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए नियमित आय का एक सशक्त साधन है। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन, उन्नत नस्लों के चयन, संतुलित आहार एवं पशु स्वास्थ्य प्रबंधन अपनाने की सलाह दी ताकि दूध उत्पादन बढ़ाकर बेहतर आय अर्जित की जा सके।

विशेषज्ञों ने दी आधुनिक पशुपालन की जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने डेयरी उद्यमिता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी। वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) डॉ. अशोक कुमार ने सरकारी योजनाओं, किसान उत्पादक संगठनों और समूह आधारित डेयरी उद्यमिता की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वहीं वैज्ञानिक (पशुपालन) डॉ. अनिल कुमार ने दुग्ध पशुओं के वैज्ञानिक प्रबंधन, रोग नियंत्रण, टीकाकरण, प्रजनन प्रबंधन और दूध उत्पादन बढ़ाने की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी।

महिलाओं की भूमिका और अतिरिक्त आय पर विशेष जोर

वैज्ञानिक (उद्यानिकी) डॉ. फरहाना खातून ने पशुपालन और उद्यानिकी आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली के माध्यम से अतिरिक्त आय सृजन की संभावनाओं पर चर्चा की। वहीं वैज्ञानिक (गृह विज्ञान) डॉ. मोनिका पाटेक ने महिलाओं की डेयरी उद्यमिता में भूमिका, दुग्ध उत्पादों के मूल्य संवर्धन और घरेलू स्तर पर लघु उद्यम स्थापित करने के अवसरों की जानकारी दी।

जैविक खेती और मृदा स्वास्थ्य पर भी प्रशिक्षण

वैज्ञानिक (मृदा विज्ञान) डॉ. रश्मि प्रियदर्शी ने पशुपालन से प्राप्त गोबर और जैविक अपशिष्टों के उपयोग से मृदा स्वास्थ्य सुधारने तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि डेयरी और जैविक खेती का समन्वय किसानों के लिए अतिरिक्त लाभ का माध्यम बन सकता है।

30 प्रतिभागियों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम में गयाजी जिले के सात प्रखंडों से आए 30 महिला एवं पुरुष प्रतिभागी शामिल हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें पशु आवास प्रबंधन, संतुलित आहार निर्माण, हरे चारे का उत्पादन, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन, रोग पहचान एवं रोकथाम, टीकाकरण, दुग्ध प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन सहित विभिन्न विषयों पर सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आत्मनिर्भरता और आय वृद्धि है मुख्य उद्देश्य

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों, महिलाओं और ग्रामीण युवाओं को डेयरी व्यवसाय के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना तथा उनकी आय में सतत वृद्धि सुनिश्चित करना है। समापन अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान ने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण का अधिकतम लाभ उठाने और प्राप्त ज्ञान को अपने गांवों के अन्य किसानों तक पहुंचाने की अपील की।

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