सीयूएसबी में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ पर विशेष चर्चा, महिला सशक्तिकरण पर हुआ गंभीर विमर्श

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 10 अप्रैल 2026,

गयाजी; दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में सामाजिक विज्ञान और नीति पीठ के संयुक्त तत्वावधान में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के अविलम्ब कार्यान्वयन: मुद्दे और अनिवार्यता” विषय पर एक महत्वपूर्ण चर्चा सत्र आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर गंभीर विचार-विमर्श का मंच बना।

कुलपति ने बताया ऐतिहासिक कदम

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने की। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह का प्रावधान पहले ही लागू हो जाना चाहिए था, लेकिन अब इसका प्रभावी क्रियान्वयन लोकतंत्र की गुणवत्ता को मजबूत करेगा।

महिला भागीदारी से मजबूत होगा सुशासन

सामाजिक विज्ञान और नीति पीठ के अधिष्ठाता प्रो. प्रणव कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि शासन और नीति निर्माण में वास्तविक बदलाव तभी संभव है, जब महिलाएं सक्रिय रूप से भागीदारी निभाएं। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि महिला सहभागिता से शासन अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनता है।

चुनौतियों और समाधान पर विस्तृत चर्चा

कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. समापिका महापात्र ने महिलाओं के सामने मौजूद सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. प्रीति अनिल खंदारे ने महिलाओं की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए वर्तमान में उनकी बढ़ती भागीदारी को रेखांकित किया।

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डॉ. पूनम ने अधिनियम के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं का विश्लेषण प्रस्तुत किया, जबकि डॉ. अमृता श्रीवास्तव ने विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों को उजागर किया।

डॉ. दास अंबिका भारती ने मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए आत्मविश्वास और सामाजिक समर्थन को आवश्यक बताया।
डॉ. जाधव प्रताप सिंह ने संस्थागत चुनौतियों जैसे अवसरों की कमी और सीमित प्रतिनिधित्व पर चिंता जताई।

शिक्षकों और छात्रों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में डॉ. उषा तिवारी और डॉ. रेनू सहित अन्य शिक्षकों ने भी अपने विचार साझा किए। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर विषय पर संवाद स्थापित किया, जिससे शैक्षणिक वातावरण और समृद्ध हुआ।

समापन में रखे गए महत्वपूर्ण सुझाव

सत्र के अंत में डॉ. फिरदौस फातिमा रिजवी ने पूरे विमर्श का सार प्रस्तुत करते हुए अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जागरूकता, संस्थागत सहयोग और सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का समापन डॉ. पारिजात प्रधान के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

कार्यक्रम में शामिल अतिथिगण

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