सीयूएसबी में राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, भारतीय भाषाओं में शोध को बताया ‘विकसित भारत’ की कुंजी
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 28 मार्च 2026,
गयाजी; दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में ‘भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण शोध: दृष्टि, चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ हुआ। इस संगोष्ठी का आयोजन पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
भारतीय भाषाओं में शोध की अहमियत पर जोर
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने कहा कि ‘विकसित भारत’ और ‘विश्वगुरु’ बनने का सपना भारतीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण शोध के बिना अधूरा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कृषि से जुड़े शोध अंग्रेज़ी में होते हैं, जबकि उनके लाभार्थी किसान होते हैं, जो प्रायः अंग्रेज़ी नहीं समझते। ऐसे में शोध को भारतीय भाषाओं में लाना समय की आवश्यकता है।
कुलपति ने ‘कैंपस फॉर कम्युनिटी’ पर दिया बल
संगोष्ठी के मुख्य संरक्षक एवं कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध के माध्यम से ही समाज और देश का समग्र विकास संभव है। उन्होंने ‘कैंपस फॉर कम्युनिटी’ की अवधारणा को रेखांकित करते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ना होगा।
मातृभाषा में शोध से बढ़ेगी सृजनात्मकता
संगोष्ठी संयोजक प्रो. के. शिव शंकर ने स्वागत भाषण में कहा कि भारतीय भाषाओं में शोध को बढ़ावा देना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। वहीं प्रो. तिमिर त्रिपाठी ने कहा कि मातृभाषा में शोध करने से नवाचार और सृजनात्मक सोच को मजबूती मिलती है।
डॉ. राजेश्वर कुमार ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय में भी शोध का माध्यम मातृभाषा ही था, जिससे समाज को सीधा लाभ मिलता था।
देशभर से जुटे शिक्षाविद और शोधार्थी
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविद, शोधार्थी, प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. आतिश पराशर, डीएसडब्ल्यू प्रो. पवन कुमार मिश्रा, प्रॉक्टर प्रो. प्रणव कुमार, संगोष्ठी सचिव डॉ. विकल कुमार सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
