सीयूएसबी के प्रो. रवि कांत को आईसीएसएसआर से 12 लाख का शोध अनुदान
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 20 मार्च 2026,
गयाजी; दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के स्कूल ऑफ एजुकेशन के डीन एवं विभागाध्यक्ष प्रो. रवि कांत को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) से एक प्रतिष्ठित शोध परियोजना के लिए 12 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ है। यह शोध परियोजना “उच्च शिक्षा में एआई और अकादमिक ईमानदारी: विकसित भारत@2047 के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा में एआई की धारणा एवं स्वीकृति” विषय पर आधारित है।
एक वर्ष तक चलेगी परियोजना
इस एक वर्षीय परियोजना में प्रो. रवि कांत के साथ डाक्टरल स्कॉलर डॉ. आशुतोष प्रभाकर भी शोध कार्य करेंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर प्रो. रवि कांत और डॉ. आशुतोष प्रभाकर को बधाई देते हुए उनके शोध कार्य की सराहना की।
एआई के नैतिक उपयोग पर होगा अध्ययन
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और शैक्षणिक हितधारकों के बीच एआई उपकरणों की धारणा और स्वीकृति का समालोचनात्मक अध्ययन करना है। साथ ही शैक्षणिक ईमानदारी, नैतिक उपयोग और शैक्षणिक वातावरण में एआई आधारित तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग से जुड़ी चुनौतियों का भी विश्लेषण किया जाएगा।
नीति निर्माण में मिलेगी मदद
परियोजना निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि एआई में उच्च शिक्षा को बदलने की बड़ी क्षमता है, लेकिन इसके साथ नैतिक जागरूकता और डिजिटल जिम्मेदारी की संस्कृति विकसित करना भी जरूरी है। इस अध्ययन से साक्ष्य-आधारित नीतिगत सुझाव और सर्वोत्तम प्रथाएं विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे शैक्षणिक क्षेत्र में एआई का जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
विकसित भारत 2047 की परिकल्पना से जुड़ा शोध
यह शोध परियोजना विकसित भारत@2047 की परिकल्पना के अनुरूप शिक्षा और उभरती तकनीकों के समन्वय पर भी केंद्रित होगी। अध्ययन में एआई-सहायता प्राप्त अधिगम, शैक्षणिक लेखन, मूल्यांकन प्रणाली में सुधार और उच्च शिक्षा में एआई के उपयोग से संबंधित नीतिगत ढांचे जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।