दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय में बाल भिक्षावृत्ति पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 26 फरवरी 2026,

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के सामाजिक अध्ययन विभाग द्वारा “भीख में संलग्न बच्चों के लिए विशेष सेवाएँ” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया।

भिक्षावृत्ति की उत्पत्ति को समझना जरूरी: कुलपति

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि बाल भिक्षावृत्ति देश की गंभीर सामाजिक समस्या है और इसके मूल कारणों की पहचान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह केवल अध्ययन का विषय नहीं बल्कि सामाजिक संकल्प का विषय है। उन्होंने भिक्षावृत्ति में संलग्न लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया।

कानूनी और कल्याणकारी दृष्टिकोण पर जोर

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सिटी एसएसपी कोटा किरण कुमार ने बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए दो प्रमुख दृष्टिकोण कानूनी और कल्याणकारी को प्रभावी बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों को अवसर से वंचित करना समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में एनआईएसडी के संजय पवार ने ‘स्माइल’ योजना के अंतर्गत ट्रांसजेंडर कल्याण एवं भिक्षावृत्ति में संलग्न व्यक्तियों के पुनर्वास से संबंधित प्रावधानों की जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने प्रस्तुत किए शोध और अनुभव

कार्यक्रम के दौरान समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. विजय शर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए भिक्षावृत्ति को व्यवस्थागत समस्या बताया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. हरेश पांडेय ने विषय की प्रस्तावना प्रस्तुत की, जबकि डॉ. पारिजात प्रधान ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। पटना ग्रामीण एवं नगर विकास परिषद की निदेशक अंजू सिन्हा ने भिक्षुक पुनर्वास के सफल मॉडल साझा किए। वहीं प्रो. योगेन्द्र प्रसाद त्रिपाठी ने अयोध्या के संदर्भ में भिक्षावृत्ति के जमीनी अनुभवों पर अपने विचार रखे।

छात्रों की सक्रिय सहभागिता

कार्यक्रम में एमएसडब्ल्यू एवं एमए समाजशास्त्र के विद्यार्थियों सहित विभाग के प्राध्यापकों ने सक्रिय भागीदारी की। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उम्मीद जताई कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम समाज में जागरूकता बढ़ाने और बाल भिक्षावृत्ति जैसी समस्याओं के समाधान में सहायक होंगे।

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