गयाजी में भूमि संबंधी बड़ी कार्रवाई: वर्षों पुरानी 06 जमीनें रोक सूची से मुक्त, डीएम ने दी जांच तेज करने की हिदायत

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 20 दिसंबर 2025,

गयाजी; जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने जिले में वर्षों से रोक सूची में पड़ी कई जमीनों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। लंबी जांच के बाद आज कुल 06 जमीनों को रोक सूची से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया। यह जमीनें वर्ष 2012-13 एवं 2013-14 से रोक सूची में दर्ज थीं, जिन पर खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री पर रोक लगी थी। डीएम ने बताया कि इन जमीनों के खाता-खेसरा की विस्तृत जांच जिला स्तरीय समिति द्वारा कराई गई। समिति में एडीएम राजस्व, जिला अवर निबंधक, डीसीएलआर और संबंधित अंचल अधिकारी शामिल होते हैं। समिति की रिपोर्ट के बाद यह पुष्टि हुई कि सभी जमीनें रैयती हैं और किसी भी प्रकार के न्यायालयीन विवाद, सरकारी अधिग्रहण, सीलिंग या अन्य अवरोधों से मुक्त हैं। इसके बाद इन्हें रोक सूची से हटा दिया गया है।

रोक सूची क्या है?

जिला प्रशासन द्वारा किसी जमीन पर रोक तब लगाई जाती है जब—

🔹भू-अर्जन या सरकारी स्वामित्व का संदेह हो
🔹न्यायालय में वाद लंबित हो
🔹अदालत द्वारा खरीद-बिक्री पर रोक लगी हो
🔹सरकारी जमीन की सूची में दर्ज हो

जांच के बाद यदि जमीन विवाद-रहित पाई जाती है, तो समिति की अनुशंसा पर उसे रोक सूची से हटाया जाता है। डीएम का स्पष्ट निर्देश – बेवजह चक्कर न काटें लोग

डीएम शशांक शुभंकर ने जिला अवर निबंधक और सभी डीसीएलआर को निर्देश दिया है कि—

🔹रोक सूची से संबंधित सभी लंबित फाइलें तुरंत प्रस्तुत करें
जांच तेजी से कराएं
🔹वास्तविक रैयतों को अनावश्यक रूप से कार्यालय का चक्कर न लगाना पड़े
🔹जिन जमीनों में कोई विवाद नहीं है, उनकी रजिस्ट्री की अनुमति शीघ्र दें

डीएम ने बताया कि पिछले माह ही 100 से अधिक भूमि मामलों को रोक सूची से मुक्त किया गया है और यह प्रक्रिया जारी रहेगी।

आज मुक्त की गई 06 जमीनें – विवरण

1. चंदौती अंचल, चंदौती मौजा — गुलबदन देवी उर्फ कुलवदन देवी की जमीन (2012 से रोक)
2. बोधगया अंचल, अमवा मौजा — बीरेंद्र कुमार सिंह (2013 से रोक)
3. बोधगया अंचल, नेवतापुर मौजा — प्रियंका कुमारी (2012 से रोक)
4. बोधगया अंचल, धनावा मौजा — पारस नाथ बरेलिया (2014 से रोक)
5. फतेहपुर अंचल, केतरा मौजा — विकास कुमार (2013 से रोक)
6. परैया अंचल, अजमतगंज मौजा — सरोज कुमारी मेहता (2013 से रोक)

जिला प्रशासन का यह कदम उन सैकड़ों लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जो वर्षों से अपनी जमीन की रजिस्ट्री पर लगी रोक के कारण परेशान थे।

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