महाबोधि महाविहार में विदेशी मुद्रा दान का गतिरोध खत्म, एसबीआई ने शुरू की जमा प्रक्रिया
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 27 दिसंबर 2025,
गयाजी। महाबोधि महाविहार में दान के रूप में मिले विदेशी मुद्रा के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से चला आ रहा संकट अब समाप्त हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FCRA) शाखा के स्पष्ट निर्देश के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बोधगया शाखा ने विदेशी देशों की मुद्रा स्वीकार करना शुरू कर दिया है। दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा दी गई विदेशी मुद्रा लंबे समय से बैंक में जमा नहीं हो पा रही थी, जिससे महाविहार के रखरखाव और प्रबंधन से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे थे। अब बीटीएमसी (बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति) ने एसबीआई बोधगया शाखा में 33 देशों की मुद्रा जमा कर दी है।
सबसे ज्यादा दान म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम से
महाबोधि महाविहार और बीटीएमसी कार्यालय में रखी दान पेटियों से प्राप्त विदेशी मुद्रा में म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम के श्रद्धालुओं का योगदान सबसे अधिक रहा।
प्राप्त प्रमुख विदेशी मुद्रा इस प्रकार है—
💲5,31,52,300 म्यांमार क्यात – ₹21,26,092
💲7,06,940 थाई बात – ₹17,67,350
💲10,376 अमेरिकी डॉलर – ₹9,33,840
💲28,21,00,000 वियतनामी डोंग – ₹8,46,300
इसके साथ ही श्रीलंका, कोरिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कंबोडिया, नेपाल, ब्राजील, जापान, बांग्लादेश, भूटान, यूएई, इंग्लैंड, चीन, ताइवान, कतर, ओमान, कुवैत, बहरीन, इराक और टर्की से आए पर्यटकों ने भी विदेशी मुद्रा के रूप में दान दिया।
बीटीएमसी की पहल के बाद खुला रास्ता।
जिलाधिकारी-सह-बीटीएमसी अध्यक्ष शशांक शुभंकर ने बताया कि पूर्व में आरबीआई ने एसबीआई को विदेशी दान स्वीकार करने का निर्देश दिया था, लेकिन शाखा स्तर पर यह प्रक्रिया लंबित थी। विदेशी मुद्रा के उपयोग में आ रही बाधा को दूर करने के लिए बीटीएमसी सचिव महाश्वेता महारथी ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर स्पष्ट दिशानिर्देश मांगे थे। इसके बाद मंत्रालय की ओर से आदेश जारी हुआ और बैंक ने विदेशी मुद्रा स्वीकार करना शुरू कर दिया।
इस वर्ष 2 करोड़ से अधिक का दान
डीएम ने बताया कि इस वर्ष बीटीएमसी को कुल ₹2,02,03,494 का दान प्राप्त हुआ है।
₹1,29,41,100 भारतीय मुद्रा
₹72,62,394 विदेशी मुद्रा
दान पेटियां दिसंबर के पहले पखवाड़े में खोली गईं और 15 से 23 दिसंबर तक नौ दिनों में सभी दान की गिनती पूरी की गई। विदेशी मुद्रा जमा होने के बाद अब महाबोधि महाविहार के रखरखाव, सुरक्षा, सुविधाओं के उन्नयन और पर्यटक सेवाओं को और बेहतर बनाने का रास्ता साफ हो गया है।