जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए ‘खेती बचाओ’ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 29 मई 2026,
गयाजी। टिकारी प्रखंड के ग्राम गुलेरियाचक में शुक्रवार को जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा “खेती बचाओ” प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को बदलते मौसम की चुनौतियों के बीच वैज्ञानिक एवं टिकाऊ खेती की तकनीकों से अवगत कराना था।
संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा स्वास्थ्य पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा कृषि उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी गई। आईसीएआर-आरसीईआर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के उपाय बताए।
धान की सीधी बुआई और मेड़ पर अरहर लगाने की सलाह
आईसीएआर-आरसीईआर, पटना के वरीय वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार ने किसानों को मेड़ पर अरहर की बुआई तथा खरीफ मौसम में धान की सीधी बुआई की आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन तकनीकों को अपनाकर किसान उत्पादन लागत कम कर सकते हैं और बेहतर उपज प्राप्त कर सकते हैं।
प्राकृतिक खेती और जैविक संसाधनों के उपयोग पर बल
कृषि विज्ञान केंद्र, मानपुर के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान ई. मनोज कुमार राय ने किसानों को जीवाणु खाद, हरी खाद ढैंचा, एजोला और वर्मीकम्पोस्ट के उपयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में प्राकृतिक खेती का महत्व और बढ़ेगा, क्योंकि इससे खेती की लागत कम होती है और स्वास्थ्यवर्धक उत्पादन प्राप्त होता है।
मोटे अनाज और आधुनिक तकनीकों की जानकारी
नालंदा उद्यान महाविद्यालय, नूरसराय के कनीय वैज्ञानिक देवेंद्र मंडल ने खरपतवार नियंत्रण, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा शून्य जुताई (जीरो टिलेज) तकनीक में मशीनों के प्रयोग के बारे में जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मोटे अनाज की खेती की ओर बढ़ने की सलाह देते हुए बताया कि गयाजी जिले में इनके प्रसंस्करण के लिए कार्यशाला भी तैयार हो चुकी है।
120 किसानों के बीच ढैंचा और एजोला का वितरण
कार्यक्रम में लगभग 120 महिला एवं पुरुष किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों के बीच ढैंचा और एजोला का वितरण किया गया। साथ ही सब्जी उत्पादन की उन्नत तकनीकों की भी जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने बताया कि जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के तहत समय-समय पर खेतों का अवलोकन और तकनीकी मार्गदर्शन जारी रहेगा।
