सीयूएसबी के दो प्राध्यापकों ने सिंगापुर–मलेशिया में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पेश किए शोधपत्र

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 17 मार्च 2026,

गयाजी; दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के समाजशास्त्रीय अध्ययन विभाग के दो प्राध्यापकों ने सिंगापुर और मलेशिया में आयोजित तृतीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अपने शोधपत्र प्रस्तुत कर विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। यह सम्मेलन South Asian Sociological Society द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें दक्षिण एशिया के कई देशों के विद्वानों ने भाग लिया।

डॉ. जितेंद्र राम ने प्रस्तुत किया दलितों पर शोध

समाजशास्त्रीय अध्ययन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र राम ने ‘दलितों के बीच सामाजिक बहिष्करण एवं स्थिति निर्माण: एक अनुभवजन्य अध्ययन’ विषय पर अपना शोधपत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने सम्मेलन के एक तकनीकी सत्र की अध्यक्षता भी की और प्लेनरी सत्र में संसाधन व्यक्ति के रूप में अपने विचार साझा किए।

डॉ. पारिजात प्रधान ने असमानताओं पर रखा दृष्टिकोण

विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पारिजात प्रधान ने ‘पहचान, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय: आधुनिक समाजों में असमानताओं का विश्लेषण’ विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने सम्मेलन के एक तकनीकी प्लेनरी सत्र की सह-अध्यक्षता भी की और अपने संबोधन में समावेशी विकास नीति की आवश्यकता पर बल दिया।

अनुभवजन्य शोध पर दिया जोर

डॉ. प्रधान ने कहा कि विविध सामाजिक वास्तविकताओं को समझने के लिए केवल इंडोलॉजिकल दृष्टिकोण पर आधारित पाठ्य विश्लेषण पर्याप्त नहीं है। इसके लिए अनुभवजन्य और क्षेत्र-आधारित अध्ययनों को बढ़ावा देना आवश्यक है।

कई देशों के विद्वानों ने लिया भाग

सीयूएसबी के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि इस वर्ष सम्मेलन का विषय “विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज: सतत एवं समावेशी भविष्य के लिए ज्ञान, शक्ति और नवाचार पर पुनर्विचार” था। सम्मेलन में मॉरीशस, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल सहित कई दक्षिण एशियाई देशों के विद्वानों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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