बराबर पहाड़ में इको-टूरिज्म परियोजना का मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने किया निरीक्षण

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आर्यावर्त वाणी | जहानाबाद | 10 अप्रैल 2026,

जहानाबाद; बराबर हिल क्षेत्र में चल रही इको-टूरिज्म विकास परियोजना का आज बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने विस्तृत निरीक्षण किया। यह परियोजना मुख्यमंत्री की ‘प्रगति यात्रा’ के दौरान घोषित की गई थी, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक सौंदर्य को संरक्षित करते हुए इसे एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना है।

परियोजना कार्यों की समीक्षा, गुणवत्ता पर जोर

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने परियोजना के विभिन्न घटकों की प्रगति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और तय समयसीमा के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए।

इन कार्यों को किया जा चुका है पूरा

परियोजना के तहत पहाड़ी की चोटी तक पहुंच को आसान बनाने के लिए रेड सैंडस्टोन से बनी सीढ़ियों का निर्माण पूरा हो चुका है। साथ ही, पर्यटकों की सुरक्षा के लिए रेलिंग का कार्य भी पूर्ण कर लिया गया है। क्षेत्र के तालाब का गाद निकासी और सौंदर्यीकरण कार्य भी पूरा हो चुका है, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन आकर्षण में वृद्धि हुई है।

प्रगति पर हैं कई महत्वपूर्ण कार्य

वर्तमान में सैंडस्टोन गज़ेबो, बैठने के लिए बेंच, नए प्रवेश द्वार और घाट विकास से जुड़े कार्य तेजी से जारी हैं। इन सुविधाओं के विकसित होने से पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा और क्षेत्र की सांस्कृतिक महत्ता भी सुदृढ़ होगी।

मंत्री ने दिए नए निर्देश

मंत्री ने अधिकारियों को गौघाट क्षेत्र में पार्किंग, गज़ेबो और बेंच की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इसके अलावा वर्मीकम्पोस्ट यूनिट, इको-कॉटेज और एडवेंचर गतिविधियों की स्थापना तथा खाली जगहों पर पीपल, बरगद, पाकड़ और फलदार पेड़ लगाने के निर्देश भी दिए गए।

आगामी योजनाएं: आधुनिक सुविधाओं का विकास

परियोजना के अगले चरण में इंटरप्रिटेशन सेंटर, हरित पार्क, कैफेटेरिया, वेंडर जोन और पार्किंग जैसी आधुनिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। इन कार्यों की शुरुआत जल्द होने की संभावना है।

स्थानीय रोजगार और सहभागिता पर जोर

मंत्री ने परियोजना के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। साथ ही विकास कार्यों के दौरान पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता भी दोहराई।

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