गयाजी में पॉक्सो अधिनियम पर एकदिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, शिक्षकों को बच्चों की सुरक्षा के प्रति किया गया जागरूक
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 24 अक्टूबर 2026,
गयाजी। बच्चों को यौन शोषण से बचाने, उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देने और विद्यालयों में सुरक्षित वातावरण विकसित करने के उद्देश्य से शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गयाजी के सभागार में पॉक्सो अधिनियम, 2012 पर एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के निर्देशानुसार ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के सभी प्रखंडों से नामित शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन कवच परियोजना एवं सेंटर डायरेक्ट संस्था के सहयोग से किया गया।
दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सह प्रभारी सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गयाजी सौम्या कुमारी, अतिरिक्त सिविल जज (प्रथम) मृणाल आर्यन तथा जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (सर्व शिक्षा अभियान) नित्यम कुमार गौरव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के विरुद्ध होने वाले यौन अपराधों की पहचान, ऐसे मामलों में बरती जाने वाली सावधानियों, पॉक्सो अधिनियम के कानूनी प्रावधानों और पीड़ित बच्चों तक समय पर सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।
पॉक्सो कानून और बच्चों के अधिकारों की दी गई जानकारी
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नित्यम कुमार गौरव ने बच्चों के विरुद्ध होने वाले यौन अपराधों के विभिन्न स्वरूपों तथा उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
वहीं, सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सह प्रभारी सचिव सौम्या कुमारी ने पॉक्सो अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, बच्चों के कानूनी अधिकारों और ऐसे मामलों में अपनाई जाने वाली आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में बताया। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को इस विषय में जागरूक और सक्षम बनाना था, ताकि वे जरूरत पड़ने पर बच्चों को उचित सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में पहल कर सकें।
बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाना सामूहिक जिम्मेदारी
अतिरिक्त सिविल जज (प्रथम) मृणाल आर्यन ने कहा कि बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों के साथ विश्वासपूर्ण संवाद स्थापित करने की अपील की, ताकि किसी भी प्रकार के शोषण या असुरक्षा की स्थिति में बच्चे बिना भय के अपनी बात रख सकें।
विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करना आवश्यक है, जहां बच्चे अपनी समस्याओं को साझा करने में सहज महसूस करें और उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए।
प्रत्येक विद्यालय में एक महिला और एक पुरुष शिक्षक होंगे प्रशिक्षित
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बताया गया कि जिले के प्रत्येक प्रखंड से नामित शिक्षक अपने-अपने प्रखंड के विद्यालयों में एक महिला और एक पुरुष शिक्षक को प्रशिक्षित करेंगे। इसके बाद ये प्रशिक्षित शिक्षक विद्यालयों में बच्चों के बीच पॉक्सो अधिनियम, उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा उपायों को लेकर जागरूकता फैलाएंगे।
इस पहल का उद्देश्य बच्चों से संबंधित मामलों की समय पर पहचान करना और जरूरतमंद बच्चों को पंचायत बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति, चाइल्ड हेल्प डेस्क तथा प्रखंड स्तरीय बाल विधिक सेवा केंद्र तक पहुंचाना है। इससे बच्चों को समय पर सहायता और आवश्यक कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
दो चरणों में चलेगा ‘सुरक्षित बचपन अभियान’
जिले में अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम दो चरणों में संचालित किया जाएगा।
पहला चरण: 26 से 31 अक्टूबर 2026 तक
इस चरण में जिले के न्यायिक पदाधिकारियों के मार्गदर्शन में विद्यालयों में बच्चों को पॉक्सो अधिनियम और उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा।
दूसरा चरण: 11 नवंबर 2026 से 30 नवंबर 2027 तक
इस चरण में जिले के प्रत्येक विद्यालय में बच्चों को पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों, सुरक्षा के उपायों और सहायता प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
हेल्पलाइन नंबरों की दी गई जानकारी
कार्यक्रम में बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों के संरक्षण तथा यौन शोषण से संबंधित मामलों में त्वरित सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इस दौरान बच्चों और संबंधित व्यक्तियों को सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, नालसा टोल फ्री हेल्पलाइन 15100 तथा साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में चीफ एलईडीसीएस मुकेश चंद्र, डिप्टी चीफ कृष्ण कुमार पाठक, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कर्मचारी तथा सेंटर डायरेक्ट एनजीओ के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के माध्यम से विद्यालयों में बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ जरूरतमंद बच्चों तक सहायता पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
