मुख्य सड़क के किनारे बाउंड्री विहीन विद्यालय में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल, एक कमरे में सिमटी पूरी पाठशाला

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 14 जुलाई 2026,

गयाजी। शिक्षा को देश और समाज के विकास की सबसे मजबूत नींव माना जाता है। सरकार भी समय-समय पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित विद्यालय परिसर का दावा करती रही है। लेकिन गयाजी जिले के खिजरसराय प्रखंड अंतर्गत कन्या प्राथमिक विद्यालय, महमदपुर की जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है। यहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों की सुरक्षा, उनकी पढ़ाई और मूलभूत सुविधाएं आज भी गंभीर उपेक्षा का शिकार हैं।

मुख्य सड़क किनारे बिना बाउंड्री के संचालित हो रहा विद्यालय

गयाजी–पटना मुख्य सड़क के बिल्कुल किनारे स्थित यह विद्यालय बिना किसी चहारदीवारी (बाउंड्री वॉल) के संचालित हो रहा है। विद्यालय परिसर पूरी तरह खुला है। ऐसे में अवकाश के दौरान छोटे-छोटे बच्चे खुले स्थान पर खेलते हैं और हर समय उनके सड़क की ओर जाने का खतरा बना रहता है। तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही के बीच किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। यदि कोई बच्चा खेलते-खेलते सड़क पर पहुंच जाए या कोई अनियंत्रित वाहन विद्यालय की ओर मुड़ जाए, तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती है।

मुख्य सड़क के किनारे बिना चहारदीवारी का विद्यालय

एक ही कमरे में चलती है पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई

विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था भी संसाधनों के अभाव में संघर्ष कर रही है। पूरे विद्यालय में मात्र एक ही कमरा उपलब्ध है, जिसमें कक्षा एक से लेकर पांचवीं तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई कराई जाती है। सबसे छोटे बच्चों यानी कक्षा एक के विद्यार्थियों को बरामदे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। अलग-अलग कक्षाओं के लिए अलग कमरों की व्यवस्था नहीं होने से शिक्षकों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कराना भी चुनौती बन गया है।

कार्यालय और कक्षा एक ही कमरे में

जिस एक कमरे में बच्चों की कक्षाएं संचालित होती हैं, उसी कमरे में प्रधानाध्यापक का कार्यालय भी चलता है। कार्यालय की अलमारी, आवश्यक अभिलेख और अन्य सरकारी दस्तावेज भी वहीं रखे रहते हैं। ऐसे में पढ़ाई और प्रशासनिक कार्य एक साथ संचालित होते हैं, जिससे शिक्षण वातावरण प्रभावित होता है।

बच्चों के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं

विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच-डेस्क उपलब्ध नहीं हैं। सभी बच्चे जमीन पर बैठकर अपनी किताबें और कॉपियां रखकर पढ़ाई करते हैं। डिजिटल और स्मार्ट शिक्षा की बात करने वाले दौर में यह दृश्य ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की वास्तविकता को सामने लाता है।

नीचे जमीन पर पढ़ते बच्चे

हल्की बारिश में ही जलमग्न हो जाता है विद्यालय परिसर

बरसात के मौसम में विद्यालय की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। हल्की बारिश होते ही विद्यालय के चारों ओर पानी जमा हो जाता है। बच्चे पानी के बीच से होकर विद्यालय पहुंचने को मजबूर होते हैं। इससे न केवल उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है बल्कि स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ जाते हैं।

जमे पानी में पैर रखकर विद्यालय आते बच्चे

प्रधानाध्यापक बोले – कई बार लिखा, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई

विद्यालय के प्रधानाध्यापक नवीन कुमार ने बताया कि विद्यालय की समस्याओं को लेकर कई बार वरीय अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने बताया कि विद्यालय के पास भवन के अतिरिक्त अपनी अलग जमीन नहीं है। इसी कारण जलजमाव वाले स्थान पर मिट्टी भराई जैसे कार्य भी विद्यालय स्तर से नहीं कराए जा सकते।

अभिभावकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता

स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ विद्यालय भेजते हैं, लेकिन विद्यालय की वर्तमान स्थिति उन्हें हर दिन चिंतित करती है। उनका कहना है कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा भी सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो कोई भी अप्रिय घटना पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर सकती है।

संवेदनशीलता के साथ हस्तक्षेप की जरूरत

यह मामला केवल एक विद्यालय की बदहाल व्यवस्था का नहीं, बल्कि उन दर्जनों मासूम बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से जुड़ा है, जो हर सुबह पढ़ने की उम्मीद लेकर इस विद्यालय पहुंचते हैं। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को चाहिए कि इस विद्यालय का शीघ्र निरीक्षण कर चहारदीवारी का निर्माण, अतिरिक्त कक्षों का निर्माण, बेंच-डेस्क की व्यवस्था, जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जाएं।

सरकार की योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब गांव के इन नौनिहालों को भी उतना ही सुरक्षित, सम्मानजनक और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा, जितना किसी शहरी विद्यालय के बच्चों को प्राप्त होता है।

बरामदे में बैठकर पढ़ते बच्चे

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