पितृपक्ष मेला-2026 की तैयारी शुरू: 21 कोषांगों का गठन, आवास से सुरक्षा तक हर व्यवस्था होगी हाईटेक; डीएम ने आमजन से मांगे सुझाव
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 08 जुलाई 2026,
गयाजी: विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेला-2026 के सफल, स्वच्छ एवं श्रद्धालु-अनुकूल आयोजन को लेकर गयाजी जिला प्रशासन ने तैयारियों का बिगुल बजा दिया है। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले इस धार्मिक आयोजन के लिए जिला प्रशासन ने 21 कोषांगों (सेल) का गठन किया है। प्रत्येक कोषांग के लिए वरीय नोडल पदाधिकारी, नोडल पदाधिकारी एवं सदस्यों की प्रतिनियुक्ति कर उन्हें समयबद्ध कार्ययोजना के तहत सभी तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
डीएम ने अधिकारियों और समाजसेवियों के साथ की पहली समीक्षा बैठक
जिला परिषद सभागार में आयोजित पहली समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने सभी कोषांगों के पदाधिकारियों एवं समाजसेवियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष पंडा समाज, समाजसेवियों और प्रशासन के बेहतर समन्वय से पितृपक्ष मेला सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था। इस बार नियमित व्यवस्थाओं के साथ नवाचारों को भी शामिल कर मेले को और बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
जिलाधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष गया जी डैम में नाव के माध्यम से पूजन सामग्री की सफाई तथा लेजर शो के जरिए पिंडदान के धार्मिक महत्व का प्रदर्शन श्रद्धालुओं के बीच काफी सराहा गया था। इस वर्ष भी नए सुझावों के आधार पर कई अभिनव पहल की जाएंगी।
21 कोषांग संभालेंगे पूरे मेले की जिम्मेदारी
प्रशासन ने आवासन, स्वच्छता, पेयजल, स्वास्थ्य, विद्युत, यातायात, सुरक्षा, सूचना प्रबंधन, प्रचार-प्रसार, आपदा प्रबंधन, संचार सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग कोषांग बनाए हैं। इनकी जिम्मेदारी होगी कि मेला शुरू होने से पहले सभी तैयारियां पूरी कर श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न होने दें।
आवास व्यवस्था होगी और बेहतर
देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए होटल, धर्मशाला, गेस्ट हाउस, विद्यालय, महाविद्यालय और अन्य भवनों में आवास की व्यवस्था की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर टेंट सिटी भी विकसित की जाएगी। सभी आवास स्थलों पर पेयजल, बिजली, शौचालय, चिकित्सा सुविधा, बिस्तर, पंखा और प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। जर्जर भवनों को आवास स्थल के रूप में उपयोग नहीं किया जाएगा तथा जलजमाव वाले स्थलों को पहले से चिन्हित कर सुधार किया जाएगा।
स्वच्छता, पेयजल और शौचालय पर रहेगा विशेष फोकस
मेला क्षेत्र के सभी प्रमुख मार्गों, घाटों, वेदियों और सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई होगी। कूड़ा उठाव, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और नालों की सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। प्रत्येक 200 से 500 मीटर की दूरी पर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था होगी। पुराने चापाकलों की मरम्मत, पानी के टैंकर, मोबाइल शौचालय और सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी।
सड़क, बिजली और रोशनी होगी दुरुस्त
मेला क्षेत्र की सभी प्रमुख एवं संपर्क सड़कों, गलियों और नालियों की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर कराई जाएगी। खराब ट्रांसफॉर्मर, जर्जर बिजली के तार और पोल बदले जाएंगे। अतिरिक्त स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट लाइट लगाई जाएंगी तथा विद्युत शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी।
24 घंटे सक्रिय रहेंगी स्वास्थ्य सेवाएं
विष्णुपद मंदिर, प्रमुख घाटों, आवास स्थलों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर अस्थायी स्वास्थ्य शिविर स्थापित किए जाएंगे। पर्याप्त संख्या में डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस, ऑक्सीजन, जीवनरक्षक दवाएं और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध रहेंगे। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी के साथ संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए भी विशेष व्यवस्था की जाएगी।
यातायात और सुरक्षा व्यवस्था होगी हाईटेक
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक ट्रैफिक प्लान लागू किया जाएगा। पार्किंग स्थल, पुलिस सहायता केंद्र, रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड से धार्मिक स्थलों तक परिवहन सुविधा विकसित की जाएगी। पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से होगी। पर्याप्त संख्या में पुलिस बल, दंडाधिकारी, महिला पुलिस और अस्थायी पुलिस शिविर तैनात किए जाएंगे।
डिजिटल सेवाओं का मिलेगा लाभ
प्रशासन पितृपक्ष मेला की वेबसाइट और मोबाइल ऐप को अपडेट करेगा, जहां आवास, परिवहन, स्वास्थ्य, संपर्क सूत्र और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध रहेंगी। सोशल मीडिया, रेडियो, होर्डिंग, ब्रोशर और अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
24×7 कॉल सेंटर और खोया-पाया केंद्र
श्रद्धालुओं की सहायता के लिए चौबीसों घंटे नियंत्रण कक्ष एवं कॉल सेंटर संचालित होगा। प्रमुख स्थलों पर हेल्प डेस्क और खोया-पाया केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां स्वयंसेवी संस्थाओं और एनसीसी के स्वयंसेवकों का भी सहयोग लिया जाएगा।
धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम और आपदा प्रबंधन पर भी जोर
मेला अवधि में विष्णुपद मंदिर परिसर सहित अन्य स्थलों पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन, प्रवचन और सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन होगा। वहीं भीड़ प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, जल सुरक्षा, एसडीआरएफ, अग्निशमन दल और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को भी पूरी तरह सक्रिय रखा जाएगा।
आम लोगों से मांगे गए सुझाव
जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने गयावासियों से पितृपक्ष मेला-2026 को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव आमंत्रित किए हैं। इच्छुक नागरिक अपने सुझाव ppmhasangam@gmail.com पर ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि समन्वित प्रयासों से पितृपक्ष मेला-2026 को सुरक्षित, स्वच्छ, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए यादगार बनाया जाए।

