असम विमान हादसे में चार वायुयोद्धाओं सहित जहानाबाद का लाल शहीद: सपनों से भरे घर में पसरा मातम
आर्यावर्त वाणी | जहानाबाद | 13 जून 2026,
जहानाबाद: शनिवार का दिन देश के लिए बेहद दुखद साबित हुआ। असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना के AN-32 परिवहन विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से देश ने अपने पांच होनहार और जांबाज वायुयोद्धाओं को हमेशा के लिए खो दिया। लैंडिंग के दौरान हुए इस भीषण हादसे के बाद विमान आग के गोले में तब्दील हो गया, जिसमें स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम की दर्दनाक मौत हो गई।
इन पांचों जवानों की शहादत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। हर आंख नम है और हर भारतीय का सिर उनके साहस, समर्पण और बलिदान के आगे श्रद्धा से झुक गया है।
जहानाबाद का बेटा जिसने सपनों को पंख दिए थे
इस हादसे में शहीद हुए फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार बिहार के जहानाबाद जिले के हुलासगंज प्रखंड अंतर्गत बनवरिया गांव के निवासी थे। उनके पिता अमरेंद्र कुमार उर्फ पप्पू एक साधारण किसान हैं। सीमित संसाधनों के बीच अपने बेटे को पढ़ाया लिखाया और उसे एक बड़ा मुकाम हासिल करते देखने का सपना संजोया था।
शुभम परिवार के बड़े बेटे थे। छोटे भाई सत्यम कुमार उन्हें अपना आदर्श मानते थे। परिवार को उम्मीद थी कि शुभम अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर और भी ऊंचाइयों को छुएंगे। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था।
आज जिस घर में बेटे की सफलता की कहानियां सुनाई देती थीं, वहां चीख-पुकार और सन्नाटा पसरा हुआ है। माता-पिता की आंखें अपने उस लाल को खोज रही हैं, जो अब कभी लौटकर नहीं आएगा।

2021 में NDA पास कर पूरा किया था सपना
शुभम कुमार बचपन से ही मेधावी, अनुशासित और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत थे। उन्होंने वर्ष 2021 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की कठिन परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय वायुसेना में प्रवेश प्राप्त किया था। गांव और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए वह प्रेरणा का प्रतीक बन गए थे।
एक किसान का बेटा जब वायुसेना की वर्दी पहनकर घर लौटा था, तब पूरे गांव ने उसे गर्व और सम्मान की नजरों से देखा था। लोगों को लगता था कि यह नौजवान आने वाले वर्षों में और बड़ी जिम्मेदारियां संभालेगा। लेकिन यह गौरवशाली यात्रा इतनी जल्दी थम जाएगी, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
कुछ महीनों बाद सजनी थी सेहरा, अब तिरंगे में लौटेगा बेटा
परिवार के लिए यह दुख इसलिए भी असहनीय है क्योंकि शुभम की शादी इसी वर्ष तय हुई थी। घर में खुशियों का माहौल था। रिश्तेदारों और परिजनों के बीच तैयारियों की चर्चाएं शुरू हो चुकी थीं।
हालांकि इसी बीच उनकी दादी के निधन के कारण विवाह की तिथि आगे बढ़ा दी गई थी। परिवार को उम्मीद थी कि जल्द ही शुभम की बारात निकलेगी और घर में नई खुशियां आएंगी।
लेकिन किस्मत ने ऐसा दर्दनाक मोड़ लिया कि अब उसी घर में शादी के गीतों की जगह मातम का सन्नाटा है। जिस बेटे को सेहरा बांधकर विदा करने की तैयारी थी, वह अब तिरंगे में लिपटकर अपने गांव पहुंचेगा। यह सोचकर ही परिजनों का कलेजा फट पड़ता है।
राष्ट्रसेवा की विरासत को आगे बढ़ा रहे थे शुभम
शुभम ऐसे परिवार से आते थे जिसकी जड़ें देशभक्ति और जनसेवा से जुड़ी रही हैं। उनके दादा योगेंद्र शर्मा उर्फ भोला बाबू बिजली विभाग में कार्यरत रहे हैं, जबकि उनके परदादा शिवदानी शर्मा स्वतंत्रता सेनानी थे।
देशसेवा की यही भावना शुभम को विरासत में मिली थी। उन्होंने भी राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए वायुसेना का मार्ग चुना और कम उम्र में ही अपनी पहचान बना ली।
पूरे इलाके में छाया शोक, लोगों को नहीं हो रहा यकीन
हादसे की खबर जैसे ही बनवरिया गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। गांव की गलियां, चौपालें और घर-आंगन इस खबर से स्तब्ध हैं। लोगों को अब भी विश्वास नहीं हो रहा कि मुस्कुराता हुआ, मिलनसार और प्रतिभाशाली शुभम अब इस दुनिया में नहीं है।
गांव के बुजुर्गों से लेकर युवा तक हर कोई उनकी उपलब्धियों को याद कर रहा है। कई लोगों की आंखें नम हैं। हर किसी के पास शुभम से जुड़ी कोई न कोई याद है, जिसे वह भावुक होकर साझा कर रहे है।
अंतिम दर्शन के इंतजार में परिवार
सूत्रों के अनुसार शहीद जवान के पार्थिव शरीर को सबसे पहले बिहटा छावनी लाया जाएगा। इसके बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके पैतृक गांव बनवरिया पहुंचाया जाएगा।
परिवार के कुछ सदस्य असम के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोग भी अपने वीर सपूत के अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने की तैयारी कर रहे हैं।
एक परिवार का नहीं, पूरे क्षेत्र का नुकसान
फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की असामयिक मृत्यु केवल एक परिवार का निजी दुख नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र और देश की क्षति है। उन्होंने अपने छोटे से जीवन में जो उपलब्धियां हासिल कीं, वह हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
उनकी शहादत ने एक पिता से उसका सहारा, एक मां से उसका दुलारा बेटा, एक भाई से उसका मार्गदर्शक और एक परिवार से उसकी सबसे बड़ी उम्मीद छीन ली है। लेकिन देश हमेशा इस वीर सपूत को सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद रखेगा।
आज बनवरिया गांव की मिट्टी अपने उस बेटे पर गर्व कर रही है जिसने वायुसेना की वर्दी पहनकर देश की सेवा की और अंततः मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए अमर हो गया।
“कुछ लोग उम्र से नहीं, अपने कर्मों से बड़े होते हैं। फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार भी उन्हीं में से एक थे।”

