अपराध और अनुशासनहीनता पर जीरो टॉलरेंस, आईजी ने किया बांकेबाजार थाना प्रभारी को निलंबित
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 10 जून 2026,
गयाजी: मगध क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव द्वारा अपराध, भ्रष्टाचार और पुलिस की कार्यशैली में किसी भी प्रकार की अनियमितता के प्रति अपनाई गई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एक बड़ी कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई से आम जनता के बीच यह स्पष्ट संदेश गया है कि कानून और कर्तव्य के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, चाहे संबंधित व्यक्ति किसी भी पद पर क्यों न हो।
ठेकेदार की शिकायत पर शुरू हुई कार्रवाई
मामला 20 मई 2026 का है, जब भवन निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार अमरेंद्र पाठक ने पुलिस महानिरीक्षक के सरकारी मोबाइल नंबर पर फोन कर शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बांकेबाजार में हिसाब-किताब के दौरान स्थानीय लोगों ने उनके साथ मारपीट की, उनकी टाटा सफारी छीन ली और उन्हें जबरन थाना लाया गया। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बांकेबाजार थानाध्यक्ष उनकी शिकायत नहीं ले रहे हैं और उन पर समझौते तथा राशि भुगतान का दबाव बना रहे हैं।
आईजी ने तत्काल दिया था विधिसम्मत कार्रवाई का निर्देश
शिकायत मिलने के तुरंत बाद आईजी विकास वैभव ने बांकेबाजार थानाध्यक्ष को विधिसम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया। बाद में शिकायतकर्ता ने पुनः संपर्क कर बताया कि उन्हें कोई सहयोग नहीं मिल रहा है तथा थाने में दबाव बनाया जा रहा है। इसके बाद आईजी ने वरीय पुलिस अधीक्षक गयाजी को मामले की जानकारी देकर वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर भेजने का निर्देश दिया।
जांच में सही पाए गए आरोप
4 जून 2026 को शिकायतकर्ता अमरेंद्र पाठक ने आईजी कार्यालय पहुंचकर लिखित आवेदन दिया। आवेदन में आरोप लगाया गया कि थानाध्यक्ष द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, गाली-गलौज की गई तथा वाहन छोड़ने के एवज में चार लाख रुपये का चेक लाने का दबाव बनाया गया। यह भी आरोप लगाया गया कि उनसे और उनके पिता से जबरन समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए।
मामले की जांच अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, शेरघाटी-1 को सौंपी गई। जांच में पाया गया कि शिकायतकर्ता के वाहन को बिना किसी आवेदन और जब्ती सूची के थाना परिसर में रखा गया था तथा चार लाख रुपये का चेक देने के बाद वाहन छोड़ने संबंधी समझौता कराया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि थानाध्यक्ष ने घटना की सूचना अपने वरीय अधिकारियों को भी नहीं दी थी।
थानाध्यक्ष को किया गया निलंबित
जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस महानिरीक्षक ने पाया कि थानाध्यक्ष द्वारा निष्पक्ष एवं विधिसम्मत कार्रवाई नहीं की गई। प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय एक पक्ष के प्रभाव में आकर दूसरे पक्ष पर दबाव बनाया गया तथा वाहन को अवैध रूप से थाना परिसर में रखा गया। इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और संदिग्ध आचरण माना गया।
इसी आधार पर बांकेबाजार थानाध्यक्ष पुलिस अवर निरीक्षक मंटु कुमार को तत्काल प्रभाव से सामान्य जीवन यापन भत्ता पर निलंबित कर विभागीय जांच प्रारंभ करने का आदेश दिया गया है।
पुलिस की जवाबदेही का सख्त संदेश
इस कार्रवाई को पुलिस प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आईजी विकास वैभव की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत हुई इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत गया है कि पुलिस व्यवस्था में किसी भी प्रकार की मनमानी, पक्षपात या अनुचित आचरण पर कठोर कार्रवाई की जाएगी और आम जनता की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा।
