बकाया मांगने पर ठेकेदार के घर फिंकवाया कूड़ा, गया नगर निगम पर गंभीर आरोप
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 23 अप्रैल 2026,
गयाजी; गुरुवार के दिन नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर के कुजापी मोहल्ला निवासी ठेकेदार अनिल भूषण ने आरोप लगाया है कि बकाया भुगतान की मांग करने पर निगम अधिकारियों ने उनके घर के सामने कूड़ा फिंकवा दिया।
पीड़ित ठेकेदार के अनुसार, वह लंबे समय से नगर निगम के लिए नल-जल, प्याऊ एवं चापाकल मरम्मत जैसे कार्य करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि पिछले करीब 7 महीनों से उनका भुगतान लंबित है। कई बार लिखित एवं मौखिक आग्रह के बावजूद भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद उन्होंने विरोध जताया।
रात में ट्रैक्टर से गिरवाया गया कूड़ा
अनिल भूषण के अनुसार, बुधवार की रात करीब 10:20 बजे नगर निगम के कूड़ा ढोने वाले ट्रैक्टर से उनके घर के मुख्य गेट पर कूड़ा गिरा दिया गया। इस घटना के कारण घर का रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध हो गया और आसपास दुर्गंध फैल गई। ठेकेदार का कहना है कि इस पूरी घटना का CCTV फुटेज भी मौजूद है, जिसमें कूड़ा गिराते वाहन स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।
परिवार को झेलनी पड़ी परेशानी
कूड़ा गिराए जाने के कारण न केवल आवागमन बाधित हुआ, बल्कि ठेकेदार के परिवार को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। उनकी बीमार मां को इलाज के लिए समय पर अस्पताल ले जाने में भी देरी हुई। वहीं, उसी परिसर में संचालित एक बैंक शाखा के कामकाज पर भी असर पड़ने की बात सामने आई है।
अधिकारियों पर सीधे आरोप
ठेकेदार ने नगर निगम के सिटी मैनेजर और जल पर्षद से जुड़े कार्यपालक अभियंता पर सीधे तौर पर इस कार्रवाई का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यह कदम दबाव बनाने और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के उद्देश्य से उठाया गया।
नगर आयुक्त ने दिए जांच के आदेश
मामले के तूल पकड़ने के बाद नगर आयुक्त ने इसे गंभीर बताते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों की पहचान कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक कार्यशैली पर उठे सवाल
यह घटना नगर निगम की जवाबदेही और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल पद के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि नागरिक अधिकारों का भी उल्लंघन माना जाएगा।
भुगतान विवाद का इस तरह विवादित रूप लेना प्रशासन और ठेकेदारों के बीच समन्वय की कमी को दर्शाता है। अब जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
