सीयूएसबी के डॉ. रोहित रंजन को 15 लाख का यूजीसी-डीएई शोध अनुदान

0
IMG-20260420-WA0003.jpg
Spread the love

आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 20 अप्रैल 2026,

गया: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के भौतिकी विभाग के प्राध्यापक डॉ. रोहित रंजन शाही को यूजीसी-डीएई सहयोगात्मक शोध अनुदान योजना के अंतर्गत लगभग 15 लाख रुपये की शोध परियोजना स्वीकृत हुई है।

इस परियोजना के तहत आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन, डाटा स्टोरेज और मेमोरी उपकरणों में उपयोगी उन्नत चुंबकीय उच्च एंट्रॉपी पदार्थों (High Entropy Alloys) पर संयुक्त अनुसंधान किया जाएगा। यह शोध भविष्य की ऊर्जा दक्ष तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा सहित अन्य संकाय सदस्यों ने इस उपलब्धि पर डॉ. शाही और उनकी टीम को बधाई दी। कुलपति ने कहा कि इस तरह का सहयोगात्मक शोध विश्वविद्यालय के साथ-साथ देश के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगा।

जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम के अनुसार, डॉ. शाही पिछले पांच वर्षों से बहु-घटक मिश्रधातुओं के चुंबकीय गुणों पर शोध कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में दो पीएचडी शोधार्थियों ने मैग्नेटिक हाई एंट्रॉपी एलॉय पर अपना शोधकार्य पूर्ण किया है।

इस परियोजना के तहत हाई एंट्रॉपी एलॉय के चुंबकीय व्यवहार पर विशेष फोकस रहेगा। साथ ही एडी करंट लॉस को कम करने के लिए नई चुंबकीय मिश्रधातुओं और उनकी पतली परतों (थिन फिल्म्स) के विकास पर कार्य किया जाएगा। यह शोध ट्रांसफॉर्मर और अन्य विद्युत उपकरणों की कार्यक्षमता बढ़ाने में मददगार होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में अधिकांश व्यावसायिक कोर मैग्नेट दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर आधारित होते हैं, जिनका आयात मुख्यतः चीन और रूस से किया जाता है। ऐसे में यह परियोजना भारत की आत्मनिर्भरता और “मेक इन इंडिया” पहल को मजबूती दे सकती है।

इस सहयोगात्मक शोध के तहत नवीन उच्च एंट्रॉपी मैग्नेट्स का डिजाइन एवं विकास सीयूएसबी में किया जाएगा, जबकि विस्तृत चुंबकीय परीक्षण इंटर-यूनिवर्सिटी एक्सेलेरेटर सेंटर में संपन्न होंगे।
अंत में डॉ. शाही ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने शोधार्थियों डॉ. राजेश मिश्रा, प्रियंका कुमारी और शशिकांत महापात्र को दिया और कहा कि यह टीमवर्क का परिणाम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page