सीयूएसबी में डॉ. अंबेडकर की 135वीं जयंती पर विशेष व्याख्यान, सामाजिक न्याय पर हुआ मंथन
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 14 अप्रैल 2026,
गयाजी: मंगलवार को दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में डॉ. बीo आर0 आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अनुसूचित जाति/जनजाति प्रकोष्ठ द्वारा विधि एवं शासन विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षकों, अधिकारियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
मुख्य वक्ता ने रखा विचार
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रो. राजेश पासवान ने डॉ. अंबेडकर के जीवन, संघर्ष और संवैधानिक दृष्टिकोण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने केवल संविधान निर्माण ही नहीं किया, बल्कि समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर आधारित समाज की नींव रखी।
पुस्तक का हुआ विमोचन
इस अवसर पर कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, प्रो. राजेश पासवान और प्रो. अशोक कुमार द्वारा डॉ. कर्मानन्द आर्य की पुस्तक “हिंदी कविता में बाबा साहेब आंबेडकर” का विमोचन भी किया गया।
महिला सशक्तिकरण और युवाओं को संदेश
प्रो. पासवान ने महिला सशक्तिकरण को सामाजिक प्रगति का आधार बताते हुए कहा कि जब तक समाज के सभी वर्ग सशक्त नहीं होंगे, तब तक सच्चे लोकतंत्र की स्थापना संभव नहीं है। उन्होंने युवाओं से डॉ. अंबेडकर के विचारों, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और संवैधानिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
कुलपति ने किया अध्यक्षीय संबोधन
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने डॉ. अंबेडकर को सभी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए उनके राष्ट्र-प्रथम दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने Martin Luther King Jr. के विचारों का उल्लेख करते हुए समानता और न्याय के वैश्विक महत्व पर भी चर्चा की।
संविधान के मूल्यों पर जोर
कार्यक्रम के दौरान प्रो. अशोक कुमार ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 17 का उल्लेख करते हुए सामाजिक समानता, समान अवसर और भेदभाव-निषेध के महत्व को समझाया। साथ ही संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक वाचन और शपथ ग्रहण भी किया गया।
इस अवसर पर प्रो. संजय प्रकाश श्रीवास्तव, प्रो. प्रदीप कुमार दास, डॉ. देव नारायण, डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. पूनम कुमारी, डॉ. चंदना सुबा, डॉ. सुनैना, डॉ. निहारिका सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
