गैस शिकायत कंट्रोल रूम बना मज़ाक, दर्जनों कॉल के बाद भी नहीं मिल रही लाइन
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 08 अप्रैल 2026,
गयाजी; रसोई गैस से जुड़ी समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन और गैस एजेंसियों द्वारा जारी कंट्रोल रूम नंबर उपभोक्ताओं के लिए राहत का जरिया बनने के बजाय परेशानी का कारण बनता जा रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के लिए जारी नंबर पर दर्जनों बार कॉल करने के बावजूद हर बार “लाइन बिजी” का संदेश सुनने को मिलता है।
मामले की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि पूरा जिला कंट्रोल रूम महज एक ही टेलीफोन लाइन के सहारे संचालित हो रहा है। ऐसे में जब एक उपभोक्ता की कॉल लगती है, तो बाकी सभी कॉलर्स के लिए नंबर लगातार व्यस्त (बिजी) हो जाता है। यही वजह है कि अधिकांश लोगों की कॉल कनेक्ट ही नहीं हो पाती और उन्हें बार-बार प्रयास करना पड़ता है।
स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब काफी मशक्कत के बाद किसी उपभोक्ता की कॉल लग भी जाती है। एक ही लाइन पर पूरे जिले की शिकायतें दर्ज होने के कारण, प्रत्येक कॉल पर लंबा समय लगता है। शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया धीमी होने से अन्य कॉलर्स को और अधिक इंतजार करना पड़ता है, जिससे लाइन लगातार व्यस्त बनी रहती है और समस्या का दायरा बढ़ता जाता है।
स्थानीय उपभोक्ताओं के अनुसार, गैस सिलेंडर की आपूर्ति में देरी, कम गैस मिलना, या बुकिंग से जुड़ी समस्याओं को लेकर वे लगातार कंट्रोल रूम से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कॉल कनेक्ट ही नहीं हो पा रही है। इससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
एक उपभोक्ता ने बताया कि “हम सुबह से लेकर शाम तक कई बार कॉल करते हैं, लेकिन हर बार नंबर बिजी बताता है। अगर शिकायत ही दर्ज नहीं होगी तो समस्या का समाधान कैसे होगा?”
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कंट्रोल रूम पर पर्याप्त स्टाफ और तकनीकी व्यवस्था नहीं होगी, तो इस तरह की दिक्कतें लगातार बनी रहेंगी। ऐसे में यह जरूरी है कि संबंधित विभाग कॉल हैंडलिंग सिस्टम को मजबूत करे, जैसे मल्टी-लाइन व्यवस्था, कॉल वेटिंग सिस्टम और डिजिटल शिकायत प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल।
उपभोक्ताओं ने मांग की है कि कंट्रोल रूम नंबर की तकनीकी खामियों को जल्द ठीक किया जाए और वैकल्पिक शिकायत माध्यम जैसे ऑनलाइन पोर्टल, मोबाइल ऐप या व्हाट्सएप नंबर भी जारी किए जाएं, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह लापरवाही उपभोक्ताओं के लिए और बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। गैस जैसी बुनियादी जरूरत से जुड़ी शिकायतों पर इस तरह की अनदेखी गंभीर सवाल खड़े करती है।

