मकर संक्रांति की खुशियों पर भारी पड़ती जानलेवा पतंगबाजी
आर्यावर्त वाणी | पटना | 15 जनवरी 2026,
पटना। मकर संक्रांति का पर्व भारतीय परंपरा, उत्साह और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है और तिल-गुड़, दान-पुण्य और पतंगबाजी के माध्यम से लोग खुशियां मनाते हैं। इसबार मकर संक्रांति का पर्व पूरे प्रदेश में 15 जनवरी को बड़े ही उल्लास के साथ मनाया गया। लेकिन बीते कुछ वर्षों से मकर संक्रांति की यह खुशी चाइनीज प्लास्टिक व नायलॉन से बने मांझे के कारण मातम में बदलती नजर आ रही है।
चाइनीज मांझा: खेल नहीं, एक खतरनाक हथियार
चाइनीज प्लास्टिक मांझा साधारण सूती धागे की तुलना में बेहद मजबूत और धारदार होता है। इसमें प्लास्टिक और कांच के महीन कण मिले होते हैं, जो इसे रेज़र की तरह तेज बना देते हैं। यही कारण है कि यह मांझा बच्चों का खेल नहीं, बल्कि एक खतरनाक हथियार बन चुका है, जिससे हर साल कई लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं और कई बार जान तक चली जाती है।
बच्चे अबोध हैं, उन्हें खतरे का अंदाजा नहीं
इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू बच्चों की मानसिकता है। बच्चे अबोध होते हैं। उन्हें इस बात का ज्ञान नहीं होता कि जिस धागे को वे मजबूती और जीत का माध्यम समझ रहे हैं, वही किसी की जान भी ले सकता है। बच्चे सिर्फ इतना जानते हैं कि चाइनीज धागा ज्यादा मजबूत होता है, जिससे उनकी पतंग कोई और काट नहीं पाएगा। यही वजह है कि बच्चे दुकानों पर उपलब्ध साधारण धागे की बजाय चाइनीज मांझे की ही मांग करते हैं और दुकानदार भी मुनाफे के लालच में इसे बेचते रहते हैं।
प्रशासन की लापरवाही बन सकती है बड़े हादसे की वजह
सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रशासन द्वारा इस गंभीर समस्या को अक्सर हल्के में लिया जाता है। हर साल कुछ घटनाओं के बाद छिटपुट कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन त्योहार से पहले और उसके दौरान कोई ठोस, निरंतर और सख्त अभियान नहीं चलाया जाता। प्रशासन की यही उदासीनता कभी भी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। यदि समय रहते इस धागे के आयात, भंडारण और बिक्री पर कड़े से कड़े अंकुश लगाए जाएं, तो इस पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
कानून है, लेकिन पालन नहीं
कई राज्यों में चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग पर कानूनी प्रतिबंध है। इसके बावजूद यह धागा खुलेआम या चोरी-छिपे बाजारों में उपलब्ध रहता है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि कानून से ज्यादा जरूरी उसका सख्ती से पालन और प्रभावी निगरानी है।
इंसानों के साथ-साथ पक्षियों पर भी कहर
चाइनीज मांझा केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पक्षियों और पशुओं के लिए भी जानलेवा साबित हो रहा है। पतंगबाजी के बाद खुले में पड़े धागे पक्षियों के पंखों में उलझ जाते हैं, जिससे वे घायल होकर दम तोड़ देते हैं। कई पशु भी इन्हीं धारदार धागों से गंभीर रूप से जख्मी हो जाते हैं।
समाधान: सख्ती, जागरूकता और जिम्मेदारी
इस समस्या का समाधान केवल अपीलों से नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई से संभव है। प्रशासन को चाहिए कि त्योहार से पहले विशेष अभियान चलाकर चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाए। अभिभावकों को बच्चों को सुरक्षित और पारंपरिक सूती धागे के उपयोग के लिए समझाना होगा। वहीं समाज और मीडिया की जिम्मेदारी है कि वे लगातार इस खतरे को उजागर करें।
मकर संक्रांति खुशियों और सकारात्मकता का पर्व है, न कि हादसों और मातम का। यदि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाए, समाज जागरूक बने और अभिभावक बच्चों का सही मार्गदर्शन करें, तो चाइनीज मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है। अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर इस जानलेवा धागे का पूरी तरह बहिष्कार करें और त्योहार को सुरक्षित और आनंदमय बनाएं।
