सीएम आवास ‘संकल्प’ में पार्श्व गायक उदित नारायण की शिष्टाचार भेंट, सांस्कृतिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

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आर्यावर्त वाणी | पटना | 24 दिसंबर 2025,

पटना; बिहार की राजनीति और कला जगत आज उस समय सुर्खियों में आ गया, जब बॉलीवुड के सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक उदित नारायण ने पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग ‘संकल्प’ में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से शिष्टाचार मुलाकात की। यह भेंट भले औपचारिक कही जा रही हो, लेकिन इसके राजनीतिक और सांस्कृतिक मायनों पर चर्चाओं का दौर तेज है। इस मुलाकात के दौरान जल संसाधन, भवन निर्माण, संसदीय कार्य एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री विजय कुमार चौधरी भी उपस्थित रहे, जिसने इस बैठक को और अधिक औपचारिक व महत्वपूर्ण बना दिया।

सांस्कृतिक सहयोग पर हुई सकारात्मक चर्चा

मुलाकात के दौरान बिहार में कला और संगीत को बढ़ावा देने के संबंध में विस्तृत बातचीत हुई। बिहार सरकार हाल के वर्षों में सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने के प्रयास में है, और ऐसे में उदित नारायण जैसे राष्ट्रीय स्तर के कलाकार की उपस्थिति को सरकार “सांस्कृतिक ब्रांडिंग” के रूप में देख सकती है।

राजनीतिक हलकों में भी सक्रियता

चूंकि बिहार निकट भविष्य में महत्वपूर्ण चुनावी चक्र में प्रवेश कर रहा है, इसलिए इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े कलाकारों से मुलाकातें सरकार के लिए सकारात्मक जनसंपर्क (PR) का माध्यम बनती हैं। उदित नारायण की लोकप्रियता, खासकर बिहार में, सरकार के लिए फायदेमंद मानी जा रही है।

सरकार और कलाकार—दोनों के लिए लाभकारी संबंध

सीएम और गायक के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई इस मुलाकात को दोतरफा लाभकारी माना जा रहा है। जहां उदित नारायण ने बिहार की सांस्कृतिक विरासत की सराहना की, वहीं राज्य सरकार ने कलाकारों के साथ सहयोग की अपनी इच्छा दोहराई। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में उदित नारायण किसी बड़े सरकारी सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।

मीडिया और सोशल मीडिया में हलचल

इस मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद मीडिया और सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है। लोग इसे बिहार की कला–संस्कृति के लिए सकारात्मक पहल बता रहे हैं, जबकि राजनीतिक विश्लेषक इसके राजनीतिक संकेतों पर भी नजर बनाए हुए हैं।

सीएम आवास पर हुई यह मुलाकात केवल शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण संदेश है। यह बिहार सरकार की सांस्कृतिक सक्रियता और सकारात्मक जनसंपर्क रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है।

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