कैंसर के उपचार में रेडियोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका, सीयूएसबी में राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 23 फरवरी 2026,

गयाजी; दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के भौतिकी विभाग द्वारा डीएसटी-पर्स (DST-PURSE) प्रायोजित “नेशनल कांफ्रेंस ऑन एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंटेशन फॉर न्यूक्लियर फिजिक्स, हाई-एनर्जी फिजिक्स एंड मेडिकल इमेजिंग” विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ सोमवार, 23 फरवरी 2026 को हुआ। कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित इस सम्मेलन में देशभर से 165 विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं तथा 60 शोध पत्र प्रस्तुति के लिए चयनित किए गए हैं।

मुख्य अतिथि डॉ. अर्चना शर्मा ने किया उद्घाटन

उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि डॉ. अर्चना शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक, यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन (सीईआरएन), जिनेवा (स्विट्जरलैंड) ने प्रो. दुर्ग विजय सिंह, प्रो. राम प्रताप सिंह तथा प्रो. वेंकटेश सिंह की उपस्थिति में सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने नाभिकीय भौतिकी, उच्च-ऊर्जा भौतिकी और चिकित्सीय इमेजिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सम्मेलन आयोजित करने के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की।

कैंसर उपचार में रेडियोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका

डॉ. शर्मा ने कहा कि नाभिकीय भौतिकी के विकास ने परमाणु संरचना और ऊर्जा के रहस्यों को समझने का मार्ग प्रशस्त किया है, जिसके आधार पर रेडियोथेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकों का विकास संभव हुआ है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक आज कैंसर उपचार में जीवनरक्षक सिद्ध हो रही है। उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों की मदद से रोगों का सटीक और प्रारंभिक निदान संभव हुआ है, जिससे उपचार की सफलता दर में वृद्धि हुई है।

मेडिकल इमेजिंग तकनीकों ने चिकित्सा क्षेत्र में लाई क्रांति

उन्होंने आगे कहा कि सीटी स्कैन, पीईटी स्कैन और एमआरआई जैसी आधुनिक इमेजिंग तकनीकों ने चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा दी है। इन तकनीकों के माध्यम से बिना शल्य-क्रिया के शरीर के भीतर की सूक्ष्म स्थितियों का अध्ययन संभव हुआ है, जिससे कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है। उन्होंने वैज्ञानिक प्रगति को मानव जीवन की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण बताया।

डीएसटी-पर्स परियोजना के तहत पहला बड़ा सम्मेलन

जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि उद्घाटन के बाद भौतिकी विभाग के प्रो. वेंकटेश सिंह ने डीएसटी-पर्स टीम की ओर से सम्मेलन समन्वयक के रूप में डॉ. अर्चना शर्मा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को पहली बार में डीएसटी-पर्स अनुदान प्राप्त होना महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इसी के अंतर्गत यह पहला सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।

विशेषज्ञों ने उन्नत तकनीकों पर रखा जोर

आर-एंड-डी सेल के निदेशक प्रो. दुर्ग विजय सिंह ने कहा कि नाभिकीय भौतिकी और मेडिकल इमेजिंग के क्षेत्र में उन्नत तकनीकों ने कैंसर उपचार को अधिक प्रभावी बनाया है। उद्घाटन सत्र का समापन जीवन विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. राम प्रताप सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. लखविंदर सिंह, प्रो. विजय राज सिंह, डॉ. रोहित रंजन शाही, प्रो. अमिया प्रियं, डॉ. नितिन चंद्र सहित कई प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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