भारतमाला परियोजना में लंबित मुआवजा भुगतान का रास्ता साफ, डीएम ने 18 रैयतों की जमीन घोषित की रैयती
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 08 मार्च 2026,
गयाजी; जिले के डीएम शशांक शुभंकर ने भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहित जमीन के लंबित मुआवजा मामले में बड़ा फैसला लिया है। जिलाधिकारी ने अपने न्यायालय में सुनवाई करते हुए 18 रैयतों की जमीन को रैयती घोषित करते हुए मुआवजा भुगतान का आदेश दिया है।
यह मामला भारत माला परियोजना के तहत बनने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 119-D (आमस–दरभंगा) से जुड़ा है। इस परियोजना के लिए कई किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन राजस्व अभिलेखों में जमीन सरकारी दर्ज होने के कारण वर्षों से मुआवजा भुगतान लंबित था।
3 किलोमीटर क्षेत्र की जमीन का मामला था लंबित
जानकारी के अनुसार आमस अंचल क्षेत्र में काज मौजा और हसनपुर मौजा के करीब तीन किलोमीटर क्षेत्र की जमीन का रैयतीकरण लंबे समय से लंबित था। यह जमीन पहले ही परियोजना के लिए ले ली गई थी, लेकिन अभिलेखों में सरकारी दर्ज होने के कारण संबंधित रैयतों को भुगतान नहीं हो पाया था।
जिलाधिकारी ने स्वयं इस मामले की सुनवाई करते हुए 18 रैयतों की जमीन को रैयती घोषित कर मुआवजा भुगतान का आदेश जारी किया।
सात दिनों में शुरू होगी मुआवजा प्रक्रिया
डीएम शशांक शुभंकर ने संबंधित रैयतों को निर्देश दिया है कि वे अपनी जमीन से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज जिला भू-अर्जन कार्यालय में जमा करें, ताकि सात दिनों के भीतर मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जा सके। साथ ही उन्होंने जिला भू-अर्जन पदाधिकारी को निर्देश दिया कि सभी पात्र रैयतों का भुगतान तेजी से सुनिश्चित किया जाए।
इन रैयतों को मिलेगा मुआवजा
जिन रैयतों की जमीन का रैयतीकरण किया गया है, उनमें मुख्य रूप से काज मौजा के उमेश कुमार, सरोज कुमार, विजय यादव, मुरारिक यादव, बुधिया देवी, परमानंद यादव, रामरक्षा यादव, महेश यादव, बिरजू यादव, नवल किशोर यादव, मालती देवी, रामवृक्ष चौधरी, संजय पासवान, धूनी चौधरी, सुरेंद्र भुइयां, अवधेश भुइयां और सेवक भुइयां शामिल हैं।
इसके अलावा हसनपुर मौजा की रैयत धनेता भुइयां की जमीन को भी रैयती घोषित करते हुए भुगतान का आदेश दिया गया है।
प्रशासन का कहना है कि इस फैसले से वर्षों से लंबित मुआवजा मामले का समाधान होगा और प्रभावित किसानों को जल्द उनका हक मिल सकेगा।