प्रभावती हॉस्पिटल में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, पीसी-पीएनडीटी अधिनियम की दी गई जानकारी
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 08 मार्च 2026,
गयाजी: जिला विधिक सेवा प्राधिकार गयाजी के तत्वावधान में प्रभावती हॉस्पिटल में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार मदन किशोर कौशिक के दिशानिर्देश तथा सचिव अरविंद कुमार दास के नेतृत्व में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर केक काटकर की गई। इसके बाद लोगों को विभिन्न कानूनी प्रावधानों और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।
पीसी-पीएनडीटी अधिनियम की दी गई जानकारी
कार्यक्रम में डालसा की पैनल अधिवक्ता कुमारी सुमन सिंह ने पीसी-पीएनडीटी अधिनियम, 1994 के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अधिनियम गर्भधारण से पहले और प्रसव पूर्व निदान तकनीकों के माध्यम से भ्रूण के लिंग निर्धारण और उसके प्रकटीकरण पर रोक लगाने के लिए बनाया गया है, ताकि कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं को रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि यह कानून आनुवंशिक असामान्यताओं या स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाने के लिए प्रसव पूर्व जांच की अनुमति देता है, लेकिन लिंग निर्धारण के उद्देश्य से इसका उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए कारावास और जुर्माने सहित कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।
14 मार्च को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत
कार्यक्रम के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कर्मचारी विकास कुमार ने बताया कि 14 मार्च 2026 को सुबह 10:30 बजे से सिविल कोर्ट गयाजी और शेरघाटी अनुमंडल कोर्ट में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि लोक अदालत में बिना कोर्ट फीस और बिना लंबी कानूनी प्रक्रिया के सुलह-समझौते के आधार पर मामलों का त्वरित निपटारा किया जाता है। लोक अदालत के निर्णय के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती और इसका फैसला अंतिम एवं बाध्यकारी होता है। उन्होंने आम लोगों से इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की।
इस अवसर पर विधिक स्वयंसेवक प्रियंका शर्मा, डालसा कर्मचारी विकास कुमार और अनिल कुमार के साथ अस्पताल की कर्मचारी जूली कुमारी, रूपा कुमारी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।