सीयूएसबी में ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म पर पाँच दिवसीय कार्यशाला संपन्न, विद्यार्थियों ने पेश किए उत्कृष्ट न्यूज़ बुलेटिन

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 17 मार्च 2026,

गयाजी; दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के जनसंचार एवं मीडिया विभाग द्वारा “बिहाइंड द माइक्रोफोन एंड कैमरा: ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य मीडिया के विद्यार्थियों को रेडियो और टेलीविजन पत्रकारिता से जुड़ी

व्यावहारिक कौशलों से परिचित कराना था।

समापन समारोह में विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना
समापन समारोह में विभागाध्यक्ष प्रो. के. शिव शंकर ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि आज का मीडिया परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और ऐसे में व्यावहारिक प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को वास्तविक मीडिया इंडस्ट्री की चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करती हैं।

व्यावहारिक प्रशिक्षण पर दिया गया विशेष जोर

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को समाचार चयन, स्क्रिप्ट लेखन, एंकरिंग, रिपोर्टिंग, कैमरा संचालन, वीडियो शूटिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग, वीडियो संपादन और न्यूज़ पैकेज निर्माण जैसी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान विभाग के प्राध्यापक डॉ. सुजीत कुमार, डॉ. अनिंद्य देब, डॉ. नेहा सूर्यवंशी, डॉ. अनुज कुमार सिंह तथा तकनीकी सहायक मोहम्मद नूर अली इमाम हसन उपस्थित रहे।

चार टीमों ने तैयार किए न्यूज़ बुलेटिन

सीयूएसबी के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि कार्यशाला में पीजी सेमेस्टर-2 और सेमेस्टर-4 के विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। विद्यार्थियों को ए, बी, सी और डी चार टीमों में विभाजित किया गया, जहां प्रत्येक टीम ने समसामयिक मुद्दों पर आधारित अपने-अपने न्यूज़ बुलेटिन तैयार किए। विद्यार्थियों ने स्वयं स्क्रिप्ट लिखी, शूटिंग की, संपादन किया और अंत में अपने तैयार न्यूज़ पैकेज की स्क्रीनिंग प्रस्तुत की।

टीमवर्क और रचनात्मक सोच का मिला अनुभव

स्क्रीनिंग सत्र के दौरान सभी टीमों के कार्यों की समीक्षा की गई और शिक्षकों द्वारा रचनात्मक सुझाव दिए गए। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस कार्यशाला ने उन्हें पत्रकारिता के व्यावहारिक पक्ष को समझने का अनूठा अवसर प्रदान किया और टीमवर्क, समय प्रबंधन तथा रचनात्मक सोच के महत्व को भी समझने में मदद मिली।

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