सीयूएसबी की प्रो. समापिका महापात्रा ने थाईलैंड में विश्व महिला अध्ययन सम्मेलन में प्रस्तुत किया शोधपत्र

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 11 जून 2026,

गयाजी: दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के समाजशास्त्रीय अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. समापिका महापात्रा ने थाईलैंड के चियांग माई स्थित एम्प्रेस चियांग माई होटल में आयोजित 12वें विश्व महिला अध्ययन सम्मेलन (डब्ल्यूसीडब्ल्यूएस-2026) में अपना शोधपत्र प्रस्तुत कर विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। उनका शोधपत्र “फाइट्स फॉर अनस्पीकेबल प्लाइट्स: नॉन-हेट्रोसेक्सुअल्स (एलजीबीटीक्यूआई प्लस) स्टेटस इन ए जेन्ड्रेड वर्ल्ड” विषय पर आधारित था।

कठोर समीक्षा प्रक्रिया के बाद हुआ चयन

प्रो. महापात्रा के शोधपत्र का चयन सम्मेलन की वैज्ञानिक समीक्षा समिति द्वारा कठोर सहकर्मी समीक्षा (पीयर रिव्यू) प्रक्रिया के उपरांत किया गया। यह उपलब्धि शोध की गुणवत्ता और विषय की वैश्विक प्रासंगिकता को दर्शाती है। सम्मेलन में विश्वभर के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया।

कुलपति ने जताया गर्व

सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रो. महापात्रा की प्रस्तुति ने वैश्विक प्रभाव वाले और सामाजिक रूप से परिवर्तनकारी शोध के केंद्र के रूप में विश्वविद्यालय की पहचान को और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की उत्कृष्ट शोध संस्कृति तथा अंतर-संस्थागत सहयोग की प्रतिबद्धता को भी प्रतिबिंबित करती है।

एलजीबीटीक्यूआई प्लस समुदाय से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा अध्ययन

जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि शोधपत्र में गैर-विषमलैंगिक और लैंगिक मानदंडों से भिन्न पहचान रखने वाले व्यक्तियों के समक्ष मौजूद संरचनात्मक हिंसा, सामाजिक भेदभाव, कलंक और कानूनी चुनौतियों का गहन विश्लेषण किया गया है। शोधपत्र की सह-लेखक डॉ. बिनीता बेहरा (केआईआईटी विश्वविद्यालय, भुवनेश्वर) तथा सीयूएसबी के शोधार्थी प्रेम प्रकाश हैं।

वैश्विक संवाद और नेटवर्किंग का मिला अवसर

वर्ष 2026 के सम्मेलन की केंद्रीय थीम “संवाद की शक्ति: आवाज़हीनता की परिस्थितियों का उन्मूलन” रही। इस सम्मेलन ने सीयूएसबी के प्रतिनिधियों को विश्वस्तरीय शिक्षाविदों एवं नीति-निर्माताओं के साथ संवाद, विचार-विमर्श और नेटवर्किंग का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

समतामूलक समाज के निर्माण की दिशा में शोध

प्रो. समापिका महापात्रा ने कहा कि सम्मेलन में शोध प्रस्तुत करने से मानवाधिकार और संरचनात्मक हिंसा से जुड़े वैश्विक विमर्श में सीयूएसबी की प्रभावी उपस्थिति दर्ज हुई है। उन्होंने कहा कि यह शोध उनके दल की सामूहिक उपलब्धि है और इसका उद्देश्य एलजीबीटीक्यूआई प्लस समुदाय को हाशिये पर धकेलने वाली परिस्थितियों को समाप्त कर समाज को अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और समतामूलक दिशा में आगे बढ़ाना है।

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