सीयूएसबी में भीख में संलग्न बच्चों के लिए विशेष सेवाओं पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 19 फरवरी 2026,

गयाजी; Central University of South Bihar (सीयूएसबी) के सामाजिक अध्ययन विभाग द्वारा 18–19 फरवरी 2026 को “भीख में संलग्न बच्चों के लिए विशेष सेवाएँ” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम National Institute of Social Defence के सहयोग तथा Ministry of Social Justice and Empowerment, भारत सरकार के प्रायोजन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में सम्पन्न हुआ।

विशेषज्ञों ने रखे महत्वपूर्ण विचार

कार्यक्रम की अध्यक्षता सामाजिक विज्ञान एवं नीति संकाय के डीन प्रो. प्रणव कुमार ने की। मुख्य अतिथि गया नगर निगम के आयुक्त अभिषेक पलासिया ने भीख से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा कि यह एक शहरी सामाजिक चुनौती है, जिसका मुख्य कारण आर्थिक असमानता और सामाजिक संवेदनशीलता की कमी है। उन्होंने इस दिशा में राज्य स्तर पर प्रभावी आर्थिक हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया।

विशिष्ट अतिथि संजय पवार ने “स्माइल योजना” के अंतर्गत ट्रांसजेंडर कल्याण और भीख में संलग्न व्यक्तियों के पुनर्वास कार्यक्रमों की जानकारी दी तथा पहचान और पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत बनाने पर बल दिया।

सामाजिक रक्षा और पुनर्वास की अवधारणा पर चर्चा

प्रो. प्रणव कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में ‘सामाजिक रक्षा’ को एक समकालीन अवधारणा बताते हुए कहा कि सामाजिक कार्य केवल नीति तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन पर केंद्रित होना चाहिए।

कार्यक्रम के प्रारंभ में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. विजय शर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि भीख की समस्या एक व्यवस्थित सामाजिक विफलता का परिणाम है। वहीं डॉ. हरेश नारायण पांडेय ने विषय की भूमिका प्रस्तुत करते हुए इसे शोषण से जुड़ी संरचनात्मक समस्या बताया।

डॉक्यूमेंट्री और तकनीकी सत्रों का आयोजन

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान “Poignant Story of Begging” शीर्षक से एक डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई, जिसमें देशभर में भीख में संलग्न बच्चों की स्थिति को दर्शाया गया। इसके बाद संजय पवार द्वारा दो तकनीकी सत्र लिए गए, जिनमें संवैधानिक प्रावधानों और पुनर्वास प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई।

नालंदा स्थित एनजीओ ‘शांति कुटीर’ के निदेशक राम किशोर प्रसाद सिंह ने अपने संगठन द्वारा भिखारियों के पुनर्वास के अनुभव साझा किए। वहीं संसाधन व्यक्ति डॉ. रवेंद्र सिंह जादौन ने बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों पर चर्चा करते हुए दंडात्मक के बजाय पुनर्वासात्मक दृष्टिकोण को अधिक प्रभावी बताया।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का सफल संचालन विभिन्न संकाय सदस्यों और शोधार्थियों के सहयोग से किया गया। अंत में डॉ. पारिजात प्रधान द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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