भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि पर किलकारी में सजी लोक संस्कृति की छटा, बच्चों ने दी संगीतमय श्रद्धांजलि
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 10 जुलाई 2026,
गयाजी: शिक्षा विभाग, बिहार सरकार की संस्था किलकारी बिहार बाल भवन, गयाजी में गुरुवार को लोक संस्कृति की दो महान विभूतियों भिखारी ठाकुर एवं पद्मश्री तीजन बाई की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने लोकगीत, लोकनाट्य और पंडवानी शैली की आकर्षक प्रस्तुतियों के माध्यम से दोनों महान कलाकारों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
दो मिनट के मौन से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत दोनों विभूतियों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर की गई। इस अवसर पर प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव ने कहा कि भिखारी ठाकुर और तीजन बाई भारतीय लोककला की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने अपनी प्रतिभा और संघर्ष के बल पर लोक संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने बच्चों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
संघर्ष और समर्पण से मिली प्रेरणा
सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी आकाश कुमार ने दोनों कलाकारों के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसाधनों की कमी कभी भी प्रतिभा की राह में बाधा नहीं बनती। उन्होंने बच्चों से कहा कि दृढ़ संकल्प, निरंतर अभ्यास और अपनी संस्कृति के प्रति समर्पण से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
‘विदेशिया’ और पंडवानी की प्रस्तुतियों ने मोहा मन
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान नाट्य प्रशिक्षक नंदकिशोर एवं उनकी टीम ने भिखारी ठाकुर की प्रसिद्ध लोकनाट्य परंपरा की झलक प्रस्तुत की। कलाकारों ने ‘विदेशिया’, ‘प्यारी देश तनी देखे द हमके’, ‘बेटी वियोग’ सहित कई लोकगीतों और रंग-संगीत की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर दर्शकों को भोजपुरी लोक संस्कृति से रूबरू कराया।
वहीं संगीत प्रशिक्षिका श्वेता कुमारी एवं तबला प्रशिक्षक दिनेश महुआर के निर्देशन में बच्चों ने पद्मश्री तीजन बाई की प्रसिद्ध पंडवानी शैली पर आधारित गीत प्रस्तुत किए। बच्चों की मधुर गायन शैली और पारंपरिक संगीत ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने का लिया संकल्प
कार्यक्रम में किलकारी बिहार बाल भवन के प्रशिक्षकों, कर्मियों, बच्चों एवं बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भाग लिया। सभी ने लोककला की इन महान विभूतियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनकी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उसे संरक्षित रखने का संकल्प लिया।
