बिजली विभाग में भ्रष्टाचार पर डीएम का बड़ा एक्शन: जांच में रिश्वतखोरी के संकेत, जेई समेत पांच पर कार्रवाई के आदेश
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 12 जून 2026,
गयाजी: जिले के इमामगंज प्रखंड में बिजली विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। मंझौली गांव निवासी उमेश साव की शिकायत पर हुई प्रशासनिक जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने न केवल विभागीय पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाया है बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई को भी रेखांकित किया है। यह मामला दर्शाता है कि यदि आम नागरिक अपनी शिकायतों को सही मंच तक पहुंचाएं तो प्रशासनिक तंत्र जवाबदेह बन सकता है।
टोका लगाकर बिजली चोरी का आरोप जांच में नहीं हुआ साबित
शिकायतकर्ता उमेश साव ने आरोप लगाया था कि उनकी आइस फैक्ट्री पर बिजली विभाग की टीम ने टोका फंसाकर मशीन चलाने का आरोप लगाया था। हालांकि जिला पदाधिकारी द्वारा अधिकृत अनुमंडल पदाधिकारी, शेरघाटी की जांच में बिजली विभाग इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। यह तथ्य महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर बिजली चोरी के आरोपों के आधार पर उपभोक्ताओं पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाती है। ऐसे में बिना पर्याप्त प्रमाण के आरोप लगाना विभागीय प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़ा करता है।
जांच में सामने आया कथित रिश्वत लेन-देन का मामला
जांच के दौरान सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया कि कनीय अभियंता सचिन कुमार द्वारा अपने विभागीय लेखापाल रंजीत कुमार के बैंक खाते में यूपीआई के माध्यम से 20 हजार रुपये प्राप्त करने के साक्ष्य मिले हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि 50 हजार रुपये नकद भी अवैध रूप से लिए गए। हालांकि नकद लेन-देन की पुष्टि जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से नहीं की गई है, लेकिन डिजिटल भुगतान के प्रमाण मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।
डीएम की कार्रवाई ने दिया स्पष्ट संदेश
अनुमंडल पदाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने कनीय अभियंता सचिन कुमार, सहायक अभियंता राजीव झा, लेखापाल रंजीत कुमार, मानव बल संजय पासवान और सुपरवाइजर विक्रम सिंह के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया है। साथ ही संबंधित कनीय अभियंता के निलंबन की अनुशंसा भी की गई है। यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि प्रशासन भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग को लेकर किसी प्रकार की नरमी बरतने के पक्ष में नहीं है।
लाइनमैन की भूमिका भी संदेह के घेरे में
जांच के दौरान लाइनमैन की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। जिला प्रशासन ने उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है। इससे यह संकेत मिलता है कि मामले में केवल उच्च अधिकारियों की ही नहीं बल्कि निचले स्तर के कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे बड़े सवाल
यह मामला केवल एक शिकायत या रिश्वतखोरी के आरोप तक सीमित नहीं है। यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही, निरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़ा विषय बन गया है। यदि बिजली चोरी का आरोप गलत साबित होता है और साथ ही रिश्वत लेने के प्रमाण सामने आते हैं, तो यह विभाग की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। ऐसे मामलों से आम उपभोक्ताओं में भय और अविश्वास की भावना भी पैदा होती है।
प्रशासनिक सख्ती से बढ़ी निष्पक्ष जांच की उम्मीद
जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से यह संदेश गया है कि भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। अब निगाहें विभागीय जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं तो यह मामला जिले में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक नजीर बन सकता है और सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
