सीयूएसबी में विद्यार्थियों की स्वनिर्मित डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का प्रदर्शन, ‘गोबर गैस’ और ‘पत्थरकट्टी’ को मिली सराहना

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 01 जून 2026,

गयाजी: सोमवार को दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के जनसंचार एवं मीडिया विभाग में विद्यार्थियों द्वारा निर्मित दो महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्री फिल्मों ‘गोबर गैस’ और ‘पत्थरकट्टी’ का विशेष प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभाग के शिक्षकों, विद्यार्थियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा दोनों फिल्मों की विषयवस्तु और प्रस्तुति की सराहना की।

गोबर गैस’ डॉक्यूमेंट्री में दिखाई गई स्वच्छ ऊर्जा की संभावनाएं

कार्यक्रम की शुरुआत ‘गोबर गैस’ विषय पर आधारित डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन से हुई। फिल्म में ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर गैस के उपयोग, पर्यावरण संरक्षण में उसकी भूमिका और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में उसकी उपयोगिता को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने स्थानीय लोगों के अनुभवों, वास्तविक दृश्यों और तकनीकी पहलुओं के माध्यम से यह दिखाया कि गोबर गैस ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वच्छ ऊर्जा के लिए कितना महत्वपूर्ण साधन बन सकती है।

पत्थरकट्टी’ में दिखी गयाजी की सांस्कृतिक विरासत

दूसरी डॉक्यूमेंट्री ‘पत्थरकट्टी’ गयाजी जिले के प्रसिद्ध पत्थरकट्टी गांव की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित थी। फिल्म में पत्थर से मूर्तियां और कलाकृतियां बनाने वाले कारीगरों के जीवन, उनकी कला, संघर्ष और बदलते समय की चुनौतियों को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। साक्षात्कारों और दृश्यांकन के माध्यम से पारंपरिक शिल्पकला के महत्व को उजागर किया गया।

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विद्यार्थियों ने स्वयं संभाली निर्माण की पूरी जिम्मेदारी

पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. नेहा सूर्यवंशी के मार्गदर्शन में तैयार की गई इन डॉक्यूमेंट्री फिल्मों में विद्यार्थियों ने रिसर्च, स्क्रिप्ट लेखन, शूटिंग, वॉयस ओवर और एडिटिंग तक की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई। विभाग के तकनीकी सहायक मोहम्मद नूर ने निर्माण कार्य में तकनीकी सहयोग प्रदान किया।

शिक्षकों ने की रचनात्मक प्रयासों की सराहना

कार्यक्रम में विभाग के डीन एवं अध्यक्ष प्रो. आतिश पराशर, प्रो. सुजीत कुमार, प्रो. अनिंद्या देब, डॉ. नेहा सूर्यवंशी, डॉ. अनुज कुमार सिंह सहित अन्य शिक्षकों ने फिल्मों की प्रस्तुति, सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग और विषय चयन की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की डॉक्यूमेंट्री समाज, पर्यावरण और लोक संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

समाज और संस्कृति से जुड़े विषयों पर कार्य करने की प्रेरणा

समापन अवसर पर प्रो. आतिश पराशर ने कहा कि मीडिया शिक्षा केवल तकनीकी दक्षता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और संस्कृति से जुड़े मुद्दों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करना भी इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है। उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य में भी जनसरोकार और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर रचनात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित किया।

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