गयाजी में वन्यजीव तस्करी पर बड़ी कार्रवाई, रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध बैग से खुला राज
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 04 फरवरी 2026,
गयाजी; जिले में वन्यजीव तस्करी का एक गंभीर मामला सामने आया है। गयाजी आरपीएफ की टीम ने दुर्लभ प्रजाति के रेड सैंड बोआ सांप की बरामदगी कर तस्करी के नेटवर्क का खुलासा किया है। सांप को बरामद करने के बाद विधिवत रूप से वन विभाग को सौंप दिया गया है। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
गश्त के दौरान पकड़े गए तस्कर
आरपीएफ निरीक्षक बनारसी यादव ने बताया कि गया रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 1B पर टीम नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान आसमानी रंग का बैग लेकर जा रहे दो व्यक्ति संदिग्ध अवस्था में दिखाई दिए। पुलिस को देखते ही दोनों भागने लगे। शक के आधार पर उन्हें पकड़कर जब बैग की तलाशी ली गई, तो उसके अंदर रेड सैंड बोआ सांप मिला।
वन विभाग को सौंपा गया सांप
मामले की जानकारी तुरंत वन विभाग को दी गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वनरक्षक वशिष्ठ कुमार और स्नैक कैचर रंजीत कुमार को रेड सैंड बोआ सांप सुपुर्द किया गया, ताकि आगे की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
मामले में दो तस्कर गिरफ्तार
आरपीएफ ने इस मामले में दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उपेंद्र कुमार (निवासी – शिवपुर, मखदुमपुर थाना, जहानाबाद) और मोहम्मद सादुल्लाह (निवासी – अमराहा गांव, चाकन्द थाना, गयाजी) के रूप में हुई है। बरामद रेड सैंड बोआ की लंबाई करीब 4 फीट बताई जा रही है।
दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति का है सांप
रेड सैंड बोआ एक दुर्लभ सांप की प्रजाति है, जो भारत के साथ-साथ ईरान और पाकिस्तान में पाई जाती है। इसकी कई उपजातियां हैं, जिनमें इंडियन सैंड बोआ, जॉन्स सैंड बोआ, रेड सैंड बोआ और ब्राउन सैंड बोआ शामिल हैं।
विषहीन होने के कारण बढ़ी मांग
रेड सैंड बोआ विषहीन सांप होता है। इसका सिर और पूंछ गोल होने के कारण इसे आमतौर पर “दोमुंहा सांप” कहा जाता है। यह मुख्य रूप से बालू वाले इलाकों में पाया जाता है। विषहीन होने और अंधविश्वास से जुड़ी मान्यताओं के कारण इसकी अवैध मांग अधिक है।
करोड़ों में होती है अंतरराष्ट्रीय कीमत
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में रेड सैंड बोआ की कीमत 3 करोड़ से लेकर 25 करोड़ रुपये तक बताई जाती है। अमीर वर्ग द्वारा इसे सौभाग्य का प्रतीक मानकर पालने की धारणा भी इसकी तस्करी को बढ़ावा देती है।
कानूनन गंभीर अपराध
आरपीएफ निरीक्षक बनारसी यादव ने बताया कि रेड सैंड बोआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सूचीबद्ध है। इसकी तस्करी करना गंभीर अपराध है। दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की सजा और 25 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। वही आरपीएफ और वन विभाग संयुक्त रूप से पूरे मामले की जांच में जुटे हैं।
