उत्तर कोयल जलाशय परियोजना को मिली नई रफ्तार, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 16 दिसंबर 2025,
गयाजी; बिहार के विकास एजेंडा को मजबूती देने की दिशा में एक और ठोस कदम उठाते हुए उत्तर कोयल जलाशय परियोजना को नई गति मिली है। मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने परियोजना की प्रगति की गहन समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने के सख्त निर्देश दिए।
भूमि हस्तांतरण व वैधानिक प्रक्रिया को प्राथमिकता
समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कोच, गुरारू और गुरुआ के अंचल अधिकारियों तथा उत्तर कोयल नहर परियोजना के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया कि परियोजना से संबंधित शेष भूमि का हस्तांतरण, वैधानिक औपचारिकताएं और प्रशासनिक प्रक्रियाएं सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ पूर्ण की जाएं, ताकि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की देरी न हो।
SIA राशि अविलंब उपलब्ध कराने का निर्देश
जिलाधिकारी ने सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) के लिए निर्धारित राशि संबंधित संस्थान को तुरंत उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी हो सकेगी और परियोजना कार्यों में आने वाली संभावित बाधाओं को दूर किया जा सकेगा।
मुआवजा भुगतान में तेजी
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने जानकारी दी कि तीनों प्रखंडों के सभी गांवों में घर-घर जाकर रैयतों से बैंक खातों से संबंधित आवश्यक दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं, ताकि मुआवजा भुगतान शत-प्रतिशत सुनिश्चित किया जा सके। अब तक 517 रैयतों को मुआवजा भुगतान किया जा चुका है, जिनमें—
🔹कोच: 101 रैयत
🔹गुरुआ: 231 रैयत
🔹गुरारू: 185 रैयत शामिल हैं।
फेज-1 में 206.153 एकड़ भूमि शामिल
अधिकारियों ने बताया कि उत्तर कोयल जलाशय परियोजना फेज-1 के अंतर्गत कुल 206.153 एकड़ भूमि शामिल है, जो तीन अंचलों में फैली हुई है—
🔹गुरारू अंचल: 190 एकड़, 20 मौजा, 400 से अधिक रैयत
🔹गुरुआ अंचल: 46.50 एकड़, 12 मौजा, लगभग 450 रैयत
🔹कोच अंचल: 34.16 एकड़, 5 मौजा, लगभग 225 रैयत
सिंचाई क्षमता में होगा बड़ा इजाफा
उत्तर कोयल जलाशय परियोजना झारखंड और बिहार के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर-राज्यीय जल संसाधन एवं सिंचाई परियोजना है। इसके पूर्ण होने से बिहार के गयाजी और औरंगाबाद जिलों में कृषि उत्पादन को नई मजबूती मिलेगी। परियोजना के जरिए गयाजी जिले में 25 से 30 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ने की संभावना है। इससे आमस, गुरुआ, गुरारू, कोच और परैया अंचलों को सीधा लाभ मिलेगा।
प्रशासन का मानना है कि परियोजना के समय पर पूर्ण होने से क्षेत्र का कृषि, रोजगार और समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास नई दिशा में आगे बढ़ेगा।