बिहार के भूमि विवाद में पुलिस की भूमिका अब होगी सीमित, कानून-व्यवस्था तक रहेगा हस्तक्षेप
आर्यावर्त वाणी | पटना | 29 जनवरी 2026,
पटना। भूमि विवादों में पुलिस हस्तक्षेप को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान प्राप्त परिवादों के विश्लेषण के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब भूमि विवाद राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत ही निपटाए जाएंगे, पुलिस की भूमिका केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित रहेगी। ये दिशा-निर्देश 1 फरवरी 2026 से पूरे राज्य में लागू होंगे।
माननीय उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भूमि विवाद के नाम पर न तो थानों की मनमानी चलेगी और न ही पुलिस हस्तक्षेप की आड़ में किसी को डराया-धमकाया जाएगा। पुलिस का कार्य शांति व्यवस्था बनाए रखना है, न कि दखल-कब्जा दिलाना, चहारदीवारी कराना या निर्माण कार्य कराना। बिना सक्षम प्राधिकार के आदेश यदि किसी स्तर पर ऐसा किया गया, तो संबंधित पदाधिकारी पर कड़ी कार्रवाई तय है।
उन्होंने कहा कि भूमि सुधार जन कल्याण संवाद में लगातार यह तथ्य सामने आया है कि कई मामलों में कानून-व्यवस्था के नाम पर अनावश्यक पुलिस हस्तक्षेप हुआ, जिसे अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संयुक्त पत्र जारी, थाना स्तर की भूमिका स्पष्ट
अपर मुख्य सचिव अरविन्द कुमार चौधरी एवं प्रधान सचिव सी.के. अनिल द्वारा जारी संयुक्त पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भूमि विवाद के मामलों में पुलिस बिना सक्षम आदेश के किसी भी प्रकार का कब्जा, निर्माण या चहारदीवारी नहीं कराएगी।
थाना डायरी में विस्तृत प्रविष्टि अनिवार्य
दिशा-निर्देश के अनुसार, भूमि विवाद की सूचना मिलते ही थाना द्वारा स्टेशन डायरी में अलग और स्पष्ट प्रविष्टि करना अनिवार्य होगा। इसमें दोनों पक्षों का नाम-पता, विवाद की प्रकृति (राजस्व, सिविल या आपसी), विवादित भूमि का पूरा विवरण, प्रारंभिक कार्रवाई तथा संबंधित राजस्व न्यायालय का उल्लेख अनिवार्य होगा।
अंचलाधिकारी को लिखित सूचना जरूरी
प्रत्येक भूमि विवाद की जानकारी थाना प्रभारी द्वारा संबंधित अंचलाधिकारी को लिखित रूप में दी जाएगी। यह सूचना ई-मेल या आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से भी भेजी जा सकेगी, जिससे राजस्व और पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
हर शनिवार अंचल स्तर पर संयुक्त बैठक
भूमि विवादों के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक शनिवार को अंचल कार्यालय में अंचलाधिकारी और थाना प्रभारी की संयुक्त बैठक अनिवार्य की गई है। इन बैठकों की प्रगति रिपोर्ट विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
धारा 107/116 की प्रक्रिया रहेगी यथावत
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 107/116 (BNS के समकक्ष) के तहत पुलिस की भूमिका पूर्ववत रहेगी, लेकिन इसका दुरुपयोग कर भूमि विवाद में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ को जमीन पर उतारने की पहल
पत्र में कहा गया है कि माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय-3 (2025-2030) के तहत “सबका सम्मान, जीवन आसान” को व्यवहार में लाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है, ताकि राज्य के लगभग 4.5 करोड़ जमाबंदी धारकों को भूमि विवादों में पारदर्शी, समयबद्ध और निष्पक्ष न्याय मिल सके।
