मानपुर पटवा टोली में बिजली व्यवस्था बदहाल, बुनकरों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट गहराया
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 10 फरवरी 2026,
गयाजी2। मानपुर की प्रसिद्ध बुनकर नगरी पटवा टोली में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे बुनकरों के समक्ष गंभीर रोज़गार संकट उत्पन्न हो गया है। क्षेत्र में करीब 60 ट्रांसफार्मरों के स्विच खराब बताए जा रहे हैं। साथ ही अधिकांश ट्रांसफार्मरों में पर्याप्त तेल की कमी है, जबकि बार, केबल और अन्य विद्युत उपकरण अत्यंत पुराने व जर्जर अवस्था में हैं।
स्थिति यह है कि किसी एक ट्रांसफार्मर या लाइन में मामूली खराबी होने पर मानपुर ब्लॉक के पास स्थित ग्रिड से पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है। इससे हजारों उपभोक्ताओं के साथ-साथ बुनकरों का कार्य पूरी तरह ठप हो जाता है। सबसे गंभीर समस्या यह है कि बिना किसी पूर्व सूचना के 4–5 घंटे तक बिजली कटौती कर दी जाती है।
मानपुर की अर्थव्यवस्था का आधार बुनकर समुदाय है। पावरलूम पर निर्भर कपड़ा बुनाई बिजली कटौती के कारण बाधित होती है, जिससे बुनकरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसका असर न केवल बुनकर परिवारों पर पड़ता है, बल्कि सरकारी राजस्व भी प्रभावित होता है।
बुनकरों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कभी 11,000 वोल्ट फॉल्ट तो कभी मेंटेनेंस के नाम पर बिजली काट दी जाती है, लेकिन विभाग की ओर से स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नजर नहीं आती। यदि रखरखाव आवश्यक है, तो उसे सुनियोजित और एक साथ किया जाना चाहिए, ताकि बार-बार और लंबी कटौती से बचा जा सके।
बिजली विभाग की इस लापरवाही और उदासीनता से आक्रोशित बुनकरों ने आंदोलन का निर्णय लिया है। बुनकरों का कहना है कि यदि शीघ्र ही ट्रांसफार्मरों की मरम्मत, उपकरणों का नवीनीकरण, पर्याप्त तेल की व्यवस्था और सुचारु बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी बिजली विभाग और प्रशासन की होगी।
बुनकरों की प्रमुख मांगें:
🔹सभी खराब ट्रांसफार्मरों व स्विचों की तत्काल मरम्मत/बदलाव
🔹ट्रांसफार्मरों में पर्याप्त तेल की सुनिश्चित व्यवस्था
🔹जर्जर तार, केबल और उपकरणों का नवीनीकरण
🔹बिजली कटौती से पहले पूर्व सूचना अनिवार्य
🔹मेंटेनेंस कार्य एक साथ और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए
मानपुर के बुनकरों ने सरकार और प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लेकर ठोस कार्रवाई की मांग की है, ताकि बुनकरों का रोजगार, क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और सरकारी राजस्व सुरक्षित रह सके।