गयाजी के मानपुर में किसान सारथी 2.0 पर क्षेत्रीय कार्यशाला, बिहार–झारखंड के 68 केवीके हुए शामिल
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 16 फरवरी 2026,
गयाजी। आईसीएआर-एटीआरआई, पटना द्वारा गयाजी-I स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में बिहार और झारखंड के कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए “किसान सारथी 2.0” पर एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य केवीके के नोडल अधिकारियों एवं अन्य हितधारकों को किसान सारथी मंच के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना, किसानों को डिजिटल रूप से प्रमाणित सलाह उपलब्ध कराना तथा विशेषज्ञों से त्वरित समाधान सुनिश्चित करना था।
‘प्रौद्योगिकी आधारित सेतु’ के रूप में किसान सारथी 2.0
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं आईसीएआर-एटीआरआई, पटना के निदेशक डॉ. अंजनी कुमार ने कहा कि किसान सारथी 2.0 वैज्ञानिकों और किसानों के बीच तकनीक आधारित सेतु का कार्य कर रहा है। यह मंच किसानों को कम समय में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित सलाह देकर उत्पादकता वृद्धि और उचित निर्णय लेने में सहायक है। उन्होंने मार्च 2026 तक किसानों की संख्या 52 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया।
13 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध प्लेटफॉर्म
डॉ. डी.वी. सिंह, प्रधान वैज्ञानिक एवं सह-प्रमुख शोधकर्ता (सीसी पीआई), ने बताया कि किसान सारथी 2.0 अब 13 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे यह अधिक सुलभ और किसान-हितैषी बन गया है। उन्होंने आईसीटी के माध्यम से कृषि विस्तार सेवाओं में सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया।
पोर्टल के विस्तार और डेटा समन्वय पर जोर
आईसीएआर-आईएएसआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. के.के. चतुर्वेदी ने केवीके द्वारा किसानों को पोर्टल से जोड़ने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने मत्स्य, पशुपालन और कृषि मशीनरी से जुड़े किसानों का डेटा उपलब्ध कराने तथा आईसीएआर और डीआईसी के संयुक्त प्रयास से पोर्टल को राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने पर बल दिया। डॉ. एस.बी. लाल ने जिला कृषि विभाग, एफपीओ एवं एनजीओ के सहयोग से मजबूत किसान डेटाबेस तैयार करने की आवश्यकता बताई।
34 राज्यों के 38 लाख गांव कवर
किसान सारथी डीआईसी के प्रबंधक श्री पी. सैलू मुदिराज ने बताया कि 2009 से विकसित यह पोर्टल अब देश के 34 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग सभी ब्लॉकों के 38 लाख गांवों को कवर कर रहा है। मंच पर मल्टीमीडिया माध्यम से वैज्ञानिकों और किसानों के बीच दोतरफा संवाद संभव है।
स्थानीय जरूरतों के अनुरूप सामग्री पर चर्चा
बीएयू, रांची के एडीईई डॉ. निरंजन लाल ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सामग्री तैयार करने पर जोर दिया। डॉ. एम. मोनोब्रुल्लाह ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट और स्थानीय भाषा में संदेश उपलब्ध कराने तथा कॉल ड्रॉप जैसी समस्याओं के समाधान की आवश्यकता बताई।
बिहार–झारखंड के आंकड़े
कार्यशाला में बताया गया कि किसान सारथी ऐप से देशभर में 2.75 करोड़ किसान जुड़े हैं।
🔹बिहार: 512 ब्लॉक, 32,148 गांव, 42.81 लाख किसान एवं 144 कृषि विशेषज्ञ।
🔹झारखंड: 261 ब्लॉक, 20,998 गांव, 9.27 लाख किसान एवं 71 कृषि विशेषज्ञ।
इनके माध्यम से कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, पशुपालन, मौसम, मंडी भाव एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जा रही है।
तकनीकी सत्र में लीची व मखाना पर विशेष प्रशिक्षण
तकनीकी सत्र में प्लेटफॉर्म की विशेषताओं, विशेषज्ञ परामर्श, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, कंटेंट अप्रूवल तंत्र तथा रियल-टाइम प्रश्न प्रबंधन का लाइव प्रदर्शन किया गया। लीची और मखाना पर फसल-विशिष्ट वैज्ञानिक संदेश तैयार करने तथा कार्यान्वयन रणनीति पर भी विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।
68 केवीके के वैज्ञानिक और युवा किसान शामिल
बिहार और झारखंड के 68 कृषि विज्ञान केंद्रों के कृषि वैज्ञानिक एवं किसान सारथी के नोडल पदाधिकारी कार्यशाला में शामिल हुए। 25 नवोन्मेषी युवा किसानों ने भी भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए।
धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम के अंत में कृषि विज्ञान केन्द्र, मानपुर, गयाजी के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान ई. मनोज कुमार राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्र, मानपुर एवं आमस, गयाजी के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों सहित विभिन्न अधिकारी एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यशाला का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक, सटीक और समयबद्ध जानकारी पहुंचाकर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जाएगा।