किलकारी बिहार बाल भवन गयाजी में सात दिवसीय कत्थक कार्यशाला का शुभारंभ

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 14 फरवरी 2026,

गयाजी: किलकारी बिहार बाल भवन में सात दिवसीय कत्थक नृत्य कार्यशाला का भव्य शुभारंभ पारंपरिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में किया गया। कार्यशाला में वाराणसी से पधारे कत्थक विशेषज्ञ सौरव दास का बच्चों द्वारा तिलक लगाकर तथा हस्तनिर्मित पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। तत्पश्चात दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यशाला का विधिवत उद्घाटन संपन्न हुआ।

बच्चों को कत्थक की ऐतिहासिक एवं तकनीकी जानकारी

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विशेषज्ञ सौरव दास ने बच्चों को कत्थक की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि कत्थक उत्तर भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैली है, जो कथावाचन परंपरा, पैरों की तेज़ चाल (तत्कार) और आकर्षक चक्करदार घूमरों के लिए जानी जाती है।
उन्होंने कहा कि यह नृत्य शैली भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, जिसमें पौराणिक कथाओं एवं भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को भाव-भंगिमाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है।

तीन प्रमुख घरानों की दी जानकारी

कार्यशाला में बच्चों को कत्थक के तीन प्रमुख घरानों 1. लखनऊ घराना (भाव प्रधान) 2. जयपुर घराना (तकनीकी प्रधान) 3. वाराणसी घराना के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विशेषज्ञ ने बताया कि कत्थक केवल एक कला विधा नहीं, बल्कि शारीरिक फिटनेस, मानसिक एकाग्रता और आत्म-अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम भी है। इसमें संतुलन, तालबोध, लचक और तकनीकी दक्षता का विशेष महत्व होता है।

सांस्कृतिक चेतना के विकास पर जोर

प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव ने कहा कि किलकारी बच्चों को कला एवं संस्कृति से जोड़ने के लिए निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहा है। इस प्रकार की कार्यशालाएँ बच्चों में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ रचनात्मकता एवं मंचीय आत्मविश्वास को भी विकसित करती हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय परंपराओं को जीवित रखने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

सात दिनों तक मिलेगा विधिवत प्रशिक्षण

सात दिवसीय इस कार्यशाला में बच्चों को कत्थक की बारीकियों का विधिवत प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही मंचीय प्रस्तुति की तैयारी भी कराई जाएगी, जिससे प्रतिभागी बच्चे अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें।

कार्यक्रम में उपस्थिति

इस अवसर पर प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी आकाश कुमार, प्रमंडल संसाधन सेवी सोनम कुमारी, सहायक लेखा पदाधिकारी गुड़िया कुमारी एवं कत्थक प्रशिक्षिका अंजली कुमारी सहित अन्य पदाधिकारी, प्रशिक्षक – प्रशिक्षिकाएं और बच्चे उपस्थित रहे।

प्रस्तुति देते किलकारी के बच्चे

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