किलकारी बिहार बाल भवन, गयाजी में सात दिवसीय कत्थक नृत्य कार्यशाला का शुभारंभ
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 08 फरवरी 2026,
गयाजी; किलकारी बिहार बाल भवन, गयाजी में सात दिवसीय कत्थक नृत्य कार्यशाला का भव्य शुभारंभ आज पारंपरिक एवं सांस्कृतिक वातावरण के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। किलकारी की परंपरा के अनुसार बच्चों ने वाराणसी से पधारे कत्थक विशेषज्ञ सौरव दास का तिलक लगाकर एवं हस्तनिर्मित पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया।
कत्थक के इतिहास और महत्व से बच्चों को कराया गया परिचित
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कत्थक विशेषज्ञ सौरव दास ने बच्चों को कत्थक नृत्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कत्थक उत्तर भारत का एक प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है, जिसकी पहचान कहानी कहने की परंपरा, तीव्र ततकार और मनमोहक चक्रदार चक्करों से होती है। यह नृत्य शैली भारतीय संस्कृति, पौराणिक कथाओं और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का सजीव प्रस्तुतीकरण है।
तीन प्रमुख घरानों की दी गई विस्तृत जानकारी
श्री दास ने बच्चों को कत्थक के तीन प्रमुख घरानों—लखनऊ घराना (भाव प्रधान), जयपुर घराना (तकनीकी प्रधान) एवं वाराणसी घराना के बारे में विस्तार से बताया। साथ ही उन्होंने कत्थक को वसंत ऋतु से जोड़ते हुए इसकी सौंदर्यात्मक और भावनात्मक विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला।
शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक है कत्थक
कत्थक विशेषज्ञ ने कहा कि कत्थक केवल एक नृत्य कला नहीं, बल्कि शारीरिक फिटनेस, मानसिक एकाग्रता, संतुलन, लचक और तालबोध को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम भी है। यह बच्चों में अनुशासन और कलात्मक अभिव्यक्ति को विकसित करता है।
किलकारी का उद्देश्य बच्चों को संस्कृति से जोड़ना
प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किलकारी लगातार बच्चों को कला, संस्कृति और रचनात्मकता से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों का आयोजन करता आ रहा है। इस प्रकार की कार्यशालाएँ बच्चों में सांस्कृतिक चेतना विकसित करने के साथ-साथ हमारी शास्त्रीय परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मंचीय प्रस्तुति की भी कराई जाएगी तैयारी
सात दिवसीय इस कत्थक कार्यशाला के माध्यम से बच्चों को विधिवत शास्त्रीय नृत्य प्रशिक्षण के साथ-साथ मंचीय प्रस्तुति की भी तैयारी कराई जाएगी।
इस अवसर पर प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव, कत्थक विशेषज्ञ सौरव दास, सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी आकाश कुमार, प्रमंडल संसाधन सेवी सोनम कुमारी, कत्थक प्रशिक्षिका अंजली कुमारी, किलकारी के सभी प्रशिक्षक-प्रशिक्षिकाएँ, कार्यालय कर्मी एवं बड़ी संख्या में किलकारी के बच्चे उपस्थित रहे।
