भगवान वेंकटेश महाराज मंदिर का उद्घाटन एवं प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 06 फरवरी 2026,

खिजरसराय/गयाजी। मार्तण्ड कात्यायनी शक्तिपीठ, खिजरसराय प्रखंड अंतर्गत गौहरपुर की पावन भूमि पर 03 फरवरी से 11 फरवरी तक कलि मर्दन श्री वेंकटेश मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा एवं सनातन महायज्ञ का भव्य एवं दिव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन क्षेत्र में सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण और आध्यात्मिक चेतना के विस्तार का प्रतीक बनकर उभर रहा है।

भगवान वेंकटेश मंदिर का उद्घाटन एवं प्राण प्रतिष्ठा

इसी परिप्रेक्ष्य में शुक्रवार दिनांक 06 फरवरी 2026 को शक्तिपीठ स्थित भगवान श्री वेंकटेश महाराज के भव्य मंदिर का उद्घाटन एवं प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया। मान्यता है कि भगवान वेंकटेश ने कलियुग में भक्तों के कष्ट दूर करने और धर्म की रक्षा के लिए अवतार लिया है। भगवान वेंकटेश की पूजा भक्त अपने कर्ज मुक्ति, धन-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति के लिए करते हैं।

ब्रह्म कल्कि अवतार फाउंडेशन के तत्वावधान में यज्ञ

यह महायज्ञ ब्रह्म कल्कि अवतार फाउंडेशन के तत्वावधान में संपन्न हो रहा है। आयोजन में शिव पञ्चानन की महत्ता, वैदिक परंपराओं तथा सनातन मूल्यों का गूढ़ और व्यापक संदेश निहित है, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चिंतन की दिशा में प्रेरित कर रहा है।

भक्तिमय वातावरण, श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़

यज्ञ स्थल पर प्रतिदिन श्रद्धालुओं की निरंतर उपस्थिति बनी हुई है, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया है। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का विशेष प्रभाव देखने को मिल रहा है।

संकल्प और उद्देश्य पर आयोजक का संदेश

महायज्ञ का संकल्प जलेश्वर नाथ पाण्डेय द्वारा लिया गया है। उन्होंने बताया कि आज के दौर में लोग धर्म कार्यों से विमुख हो रहे, तेज़ जीवन-शैली, भौतिक सुखों की प्राथमिकता, तकनीक पर बढ़ती निर्भरता और समयाभाव के कारण आध्यात्मिक चिंतन पीछे छूटता जा रहा है। कई लोग धर्म को आडंबर या पुरानी परंपरा मानकर उससे दूरी बना रहे हैं, जबकि धर्म का मूल उद्देश्य नैतिकता, संयम और मानवता का विकास है। उनका मानना है कि सकारात्मक कर्म और आध्यात्मिक साधना ही समाज को सही दिशा दे सकती है।

सामाजिक समरसता और एकता का संदेश

आयोजकों का कहना है कि इस महायज्ञ के माध्यम से सनातनी समाज में आपसी एकता, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का संचार हो रहा है। यह आयोजन समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम  माना जा रहा है।

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