सीयूएसबी में राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम: “भिक्षावृत्ति उन्मूलन के बिना विकसित भारत 2047 संभव नहीं”

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 20 फरवरी 2026,

गयाजी; सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (सीयूएसबी) के सामाजिक अध्ययन विभाग द्वारा “भीख में संलग्न बच्चों के लिए विशेष सेवाएँ” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भिक्षावृत्ति उन्मूलन को लेकर विशेषज्ञों ने गंभीर चर्चा की।

कार्यक्रम को National Institute of Social Defence और Ministry of Social Justice and Empowerment, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि बाल भिक्षावृत्ति सामाजिक और आर्थिक संरचना से जुड़ी गंभीर समस्या है और इसके उन्मूलन के बिना “विकसित भारत 2047” का लक्ष्य अधूरा रहेगा।

पुनर्वास और संरक्षण पर केंद्रित तकनीकी सत्र

कार्यक्रम में डॉ. के. लिंगास्वामी, स्कूल ऑफ सोशल वर्क, नई दिल्ली ने भिक्षावृत्ति में संलग्न बच्चों के लिए एकीकृत संरक्षण और पुनर्वास सेवाओं पर प्रकाश डाला। Chanakya University की एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. सुदेशना मुखर्जी ने “बाल भिक्षावृत्ति के मार्गों का मानचित्रण और लक्षित सेवाएँ” विषय पर व्याख्यान देते हुए इसके अध्ययन के लिए सैद्धांतिक ढांचा प्रस्तुत किया।

डॉ. के. के. राजेश्वरी रायुडु ने हैदराबाद क्षेत्र के संदर्भ में संस्थागत चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि पेशेवर सामाजिक कार्यकर्ताओं को परामर्श के लिए अधिक समय और संसाधनों की आवश्यकता है।

सामाजिक संगठनों की भागीदारी पर जोर

कार्यक्रम में गयाजी स्थित सामाजिक संस्था Council of Magadh Women Empowerment के प्रतिनिधियों ने बाल भिक्षावृत्ति रोकने में समाज की भूमिका पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने कहा कि भिक्षावृत्ति अब कई स्थानों पर संगठित रूप ले चुकी है, जिससे इसे रोकने के लिए बहुस्तरीय रणनीति जरूरी है।

नीति मूल्यांकन और सामाजिक भागीदारी की आवश्यकता

समापन सत्र में छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. पवन कुमार मिश्रा ने कहा कि वर्षों से कई विधेयक बनाए गए हैं, लेकिन उनके प्रभाव का गंभीर मूल्यांकन आवश्यक है। समाजशास्त्रीय अध्ययन विभागाध्यक्ष प्रो. एम. विजय कुमार शर्मा ने कहा कि समाज स्वयं एक प्रयोगशाला है और इसमें प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है।

परीक्षा नियंत्रक डॉ. शांति गोपाल पाइन ने कहा कि भिक्षावृत्ति के उन्मूलन के बिना विकसित भारत का लक्ष्य संभव नहीं है। वहीं सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. प्रणव कुमार ने बताया कि भीख मांगने में संलग्न बच्चे सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं और उन्हें विशेष सहायता की आवश्यकता है।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का समापन डॉ. हरेश नारायण पांडेय के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रो. अनिल कुमार सिंह झा, प्रो. समापिका मोहापात्रा, डॉ. जितेंद्र राम, डॉ. प्रिया रंजन, डॉ. अहमदील कबीर सहित विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य उपस्थित रहे।

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