C.U.S.B में भारत-नॉर्वे सहयोग कार्यक्रम के तहत कार्यशाला का शुभारंभ

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 22 फरवरी 2026,

गयाजी; दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के गणित विभाग द्वारा भारत-नॉर्वे सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत “बहु-भौतिकी समस्याओं हेतु संख्यात्मक विधियाँ” विषय पर आठ दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ विशेषज्ञों और शोधार्थियों की उपस्थिति में किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य ऊर्जा, विभिन्न स्केलों तथा शिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्रों में भारत और नॉर्वे के बीच अंतर्विषयक सहयोग को बढ़ावा देना है।

संख्यात्मक विधियां जटिल वैज्ञानिक समस्याओं के समाधान में सहायक

उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति के सी सिन्हा ने अपने संबोधन में फज़ी ऑप्टिमाइज़ेशन और गणितीय मॉडलिंग के उदाहरणों के माध्यम से बहु-भौतिकी समस्याओं में संख्यात्मक विधियों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक चुनौतियों के समाधान में पारंपरिक विश्लेषणात्मक पद्धतियां पर्याप्त नहीं हैं, ऐसे में संगणकीय एल्गोरिद्म आधारित संख्यात्मक विधियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

फाइनाइट एलिमेंट मेथड पर विशेषज्ञ व्याख्यान

कार्यशाला के दौरान प्रो० बी. वी. रतीश कुमार ने अण्डाकार समस्याओं के लिए फाइनाइट एलिमेंट मेथड (FEM) का परिचय दिया और विज्ञान तथा अभियांत्रिकी में इसके व्यावहारिक उपयोगों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने वास्तविक जीवन की समस्याओं के समाधान में कंप्यूटेशनल तकनीकों के महत्व को रेखांकित किया।

प्रयोगशाला सत्र में एमएटीएलएबी प्रशिक्षण

कार्यशाला के आगामी सत्रों में Indian Institute of Science Education and Research की डॉ. डोन्ड आशा किसन तथा Indian Institute of Technology Delhi की डॉ. कामना प्रसाद ने विषय से संबंधित व्याख्यान दिए। प्रयोगशाला सत्र के दौरान प्रतिभागियों को एमएटीएलएबी सॉफ्टवेयर पर आधारित कोडिंग और संख्यात्मक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।

इस कार्यशाला के माध्यम से गणितीय अनुसंधान और आधुनिक संगणकीय तकनीकों के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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