सीयूएसबी में ‘रिसर्च राइटिंग’ पर पाँच दिवसीय कार्यशाला संपन्न

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 17 फरवरी 2026,

गयाजी। दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) की इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल (आईआईसी) एवं पब्लिक पॉलिसी एंड ओपिनियन सेल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “रिसर्च राइटिंग” विषयक पाँच दिवसीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हो गई।

कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों के शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने जानकारी दी कि कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों की शोध तर्क निर्माण क्षमता, अनुसंधान संरचना की समझ तथा अकादमिक लेखन में स्रोतों के प्रभावी उपयोग को सुदृढ़ करना था।

विशेषज्ञों ने दिए व्याख्यान

आईआईसी अध्यक्ष प्रो. वेंकटेश सिंह एवं पब्लिक पॉलिसी एंड ओपिनियन सेल के समन्वयक प्रो. प्रवीण कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में अंग्रेज़ी विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. अर्पणा झा ने “क्राफ्टिंग योर रिसर्च एंड राइटिंग” विषय पर शोध तर्क, विषय, थीम और मत के बीच अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने गतिविधि-आधारित सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यापक विषयों को स्पष्ट शोध तर्क में परिवर्तित करने तथा टॉपिक–प्रॉब्लम–आर्गुमेंट संरचना को समझने का प्रशिक्षण दिया।
विधि एवं शासन अध्ययन विद्यालय की सहायक प्राध्यापिका डॉ. कुमारी नीतू ने “स्ट्रक्चरिंग योर पेपर एंड एक्सप्लोरिंग सोर्सेज” विषय पर सत्र लिया। उन्होंने उभरते शोध क्षेत्रों की पहचान, आलोचनात्मक अध्ययन क्षमता के विकास तथा The Hindu, The Indian Express और The Times of India जैसे प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों एवं पत्रिकाओं के नियमित अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला।

एआई टूल्स के उपयोग पर विशेष सत्र

कार्यशाला का समापन सह-प्राध्यापक डॉ. नेमी चंद्र राठौर के “लेवरेजिंग एआई टूल्स इन रिसर्च” विषयक मुख्य व्याख्यान से हुआ। उन्होंने संदर्भ उद्धरण (साइटेशन) की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि प्रासंगिक स्रोतों के साथ समुचित उद्धरण अकादमिक गुणवत्ता को सुदृढ़ करता है। साथ ही अनुसंधान कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जिम्मेदार एवं नैतिक उपयोग पर विशेष जोर दिया।

सफल संचालन एवं समन्वय

कार्यक्रम का संचालन मधुश्री एवं बिपाशा ने किया। वहीं आईसीसी (पब्लिक पॉलिसी) के सदस्य प्रियांशु कांत, अभिषेक, आरुष, आरोही, प्रेमानंद, सैफ, स्वीटी, रोहिणी, गोविंद, देवांशु, श्रेया, नवनीत, राशि, गौतम, शुभांशु, आनंद, समृद्धि, कनिष्क, प्रियांशु आनंद, सूरज एवं प्रणव ने प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया।

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