बोधगया में खुलेगा “खादी ग्लोबल शो रूम”, एमएसएमई मंत्री की अध्यक्षता में अहम बैठक

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 17 फरवरी 2026,

गयाजी; बोधगया में खादी को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। महात्मा गांधी के स्वदेशी और खादी के विचारों तथा प्रधानमंत्री द्वारा युवाओं से खादी अपनाने की अपील को ध्यान में रखते हुए 17 फरवरी 2026 को होटल वेलकम (आईटीसी), बोधगया में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री जीतन राम मांझी ने की।

अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल पर खादी को वैश्विक मंच

बैठक में “खादी ग्लोबल शो रूम” की स्थापना हेतु उपयुक्त भूमि चयन एवं अन्य प्रक्रियात्मक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बोधगया एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल है, जहां वर्ष भर देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। ऐसे में यहां “खादी ग्लोबल शो रूम” की स्थापना से खादी उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शन और बिक्री का सशक्त मंच मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य खादी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना और स्थानीय कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराना है। शो रूम के लिए भूमि का निरीक्षण भी किया गया तथा भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया प्रारंभ किए जाने की जानकारी दी गई।

उच्चस्तरीय अधिकारियों की रही भागीदारी

बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें—
🔹रूप राशि, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, खादी और ग्रामोद्योग आयोग
🔹विपुल गोयल, संयुक्त सचिव, MSME मंत्रालय
🔹डॉ० मोहम्मद हनीफ मेवाती, राज्य निदेशक, KVIC, पटना
🔹सेंथिल कुमार सी.बी., उप निदेशक, KVIC, मुंबई
🔹डॉ० निलेश रामचन्द्र देवरे, सचिव (पर्यटन), बिहार सरकार
🔹अमन समीर, निदेशक (MSME), बिहार सरकार
🔹शशांक शुभंकर, जिलाधिकारी, गयाजी
🔹डॉ० विद्यानंद सिंह, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड
🔹बिनोद कुमार, प्रबंधक, भारत पर्यटन विकास निगम
🔹आर. के. चौधरी, निदेशक, डीएफओ, पटना
🔹बंदना, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केन्द्र, गयाजी
सभी अधिकारियों ने शो रूम स्थापना की प्रक्रिया को शीघ्र गति देने पर सहमति जताई।

स्थानीय कारीगरों को मिलेगा प्रोत्साहन

विशेषज्ञों का मानना है कि “खादी ग्लोबल शो रूम” की स्थापना से न केवल खादी उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय बुनकरों और कारीगरों को भी स्थायी बाजार उपलब्ध होगा। बोधगया जैसे अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में इस पहल से खादी को एक नई पहचान मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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