भूमि से जुड़ी हर समस्या का समाधान संवाद से, बोधगया में भूमि सुधार जनकल्याण संवाद

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 28 जनवरी 2026,

बोधगया; राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा शुरू किया गया भूमि सुधार जनकल्याण संवाद अब जमीन पर असर दिखाने लगा है। बुधवार को उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा बोधगया स्थित कन्वेंशन सेंटर में भूमि सुधार जनकल्याण संवाद का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। इस संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जनता की बात सुनकर भूमि से जुड़े हर वास्तविक मुद्दे का समाधान सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा— “विभाग बदलाव के लिए संकल्पित है और इस बदलाव की बयार में जनता का सहयोग जरूरी है।”

जनसंवाद से जनसरोकारों को जोड़ने का प्रयास

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि सुधार और भूमि विवाद विधिक व व्यवहारिक दोनों दृष्टि से जटिल विषय हैं। इसी कारण विभाग ने कार्यकाल के पहले 100 दिनों में प्रमंडल और जिला स्तर पर जनसंवाद का निर्णय लिया है। यदि इसके बाद भी समस्याएं बनी रहती हैं तो अंचल स्तर पर भी संवाद आयोजित किए जाएंगे। इस प्रक्रिया से वास्तविक फीडबैक मिल रहा है और उसी के आधार पर नीतिगत व प्रशासनिक सुधार किए जा रहे हैं।

सैनिकों और सुरक्षाकर्मियों के मामलों को प्राथमिकता

श्री सिन्हा ने राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि देश और समाज की सेवा करने वाले सैनिकों व पुलिसकर्मियों से जुड़े भूमि मामलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और इसमें अनावश्यक समयसीमा न लगाई जाए।

अब सभी सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन

उपमुख्यमंत्री ने आम लोगों को जानकारी दी कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की सभी सेवाएं अब पूरी तरह ऑनलाइन हैं। बिहारभूमि पोर्टल के माध्यम से मोबाइल से ही आवेदन किया जा सकता है। तकनीकी जानकारी नहीं रखने वालों के लिए प्रत्येक अंचल कार्यालय में सीएससी केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां तय दर पर सेवाएं उपलब्ध हैं।

पूरे राज्य में दिख रहा संवाद का असर

12 दिसंबर को पटना से शुरू हुए भूमि सुधार जनकल्याण संवाद के तहत अब तक लखीसराय, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा और भागलपुर में कार्यक्रम हो चुके हैं। 31 जनवरी को दरभंगा में संवाद प्रस्तावित है। इन जिलों में दाखिल–खारिज, परिमार्जन और मापी के मामलों में तेजी आई है।

परिमार्जन प्लस में पहली बार तय हुई समय सीमा

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि परिमार्जन प्लस मामलों में पहली बार स्पष्ट समय सीमा तय की गई है।
🔹लिपिकीय त्रुटियों का सुधार: 15 कार्य दिवस
🔹तकनीकी त्रुटियों का सुधार: 35 कार्य दिवस
🔹जटिल मामले: अधिकतम 75 कार्य दिवस
इसके साथ ही एससी–एसटी पर्चाधारियों को दखल दिलाने के लिए 16 दिसंबर से ऑपरेशन भूमि दखल देहानी शुरू किया गया है।

नई व्यवस्थाएं और डिजिटल सुविधाएं

शहरी क्षेत्रों में वंशावली निर्गत करने की जिम्मेदारी अंचलाधिकारियों को दी गई है। पारिवारिक बंटवारा पोर्टल से एक साथ बंटवारा और दाखिल–खारिज की सुविधा शुरू की गई है। राजस्व अभिलेखों की सत्यापित नकल अब केवल ऑनलाइन उपलब्ध है, जिसे डिजिटल हस्ताक्षर के साथ वैधानिक मान्यता दी गई है। जाली दस्तावेजों पर अनिवार्य प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश भी जारी किया गया है।

मापी व्यवस्था की मुख्यमंत्री ने भी की सराहना

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय–3 के तहत अविवादित जमीन की मापी 7 दिन और विवादित जमीन की मापी 11 दिन में होगी। 14 दिन के भीतर मापी प्रतिवेदन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। प्रत्येक राजस्व कार्यालय में सोमवार और शुक्रवार को जनसुनवाई भी शुरू हो चुकी है।

कॉल सेंटर, कैथी लिपि समाधान और जनता दरबार

1800-3456-215 नंबर से संचालित कॉल सेंटर को जनशिकायत पोर्टल से जोड़ा गया है, जहां दर्ज शिकायतों की मॉनिटरिंग होती है। कैथी लिपि में पुराने दस्तावेजों के अनुवाद के लिए 31 विशेषज्ञों का पैनल बनाया गया है। अब हर शनिवार थाना की जगह अंचल कार्यालय में जनता दरबार आयोजित होगा, जिसमें थाना प्रभारी भी मौजूद रहेंगे।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस

उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मसौढ़ी और अररिया में रिश्वतखोरी के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए कर्मचारियों को बर्खास्त और निलंबित किया गया है।

इस कार्यक्रम में प्रधान सचिव सीके अनिल, सचिव जय सिंह, विशेष सचिव अरुण कुमार सिंह, मगध आयुक्त सफ़ीना ए0 एन0, जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर, वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, गयाजी जिले के सभी प्रखंडों के सीओ, कर्मचारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी उपस्थित रहे।

भूमि सुधार जनकल्याण संवाद के माध्यम से सरकार का उद्देश्य जमीन से जुड़े विवादों का त्वरित, पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त समाधान सुनिश्चित करना है, जिससे आम जनता को वास्तविक राहत मिल सके।

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