फाइलों में मृत घोषित कर बंद कर दी बुजुर्गों की पेंशन, जिंदा होने का प्रमाण लेकर भटक रहे वृद्ध
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 12 जनवरी 2026,
गयाजी; बिहार सरकार की मंशा, ज़मीनी हकीकत से टकराई
बिहार सरकार ने बुजुर्गों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन देने के उद्देश्य से सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि ₹400 से बढ़ाकर ₹1100 कर दी है। सरकार की मंशा थी कि वृद्धजन अपनी दैनिक जरूरतों के लिए किसी के सामने हाथ न फैलाएं। लेकिन ज़मीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी लापरवाही सामने आ रही है।
बेलागंज के सिमरा गांव में सामने आया गंभीर मामला
गयाजी जिले के बेलागंज प्रखंड अंतर्गत सिमरा गांव में करीब आधा दर्जन बुजुर्गों को बिना किसी भौतिक सत्यापन के सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर दिया गया। इसके कारण उनकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्वतः बंद हो गई, जबकि सभी बुजुर्ग जीवित हैं।
बिना सत्यापन फाइलों में लिख दी ‘मौत’
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों द्वारा न तो गांव जाकर जांच की गई और न ही परिजनों से कोई पुष्टि ली गई। कार्यालय में बैठे-बैठे ही फाइलों में बुजुर्गों को मृत दर्शा दिया गया, जिससे उनकी पेंशन बंद कर दी गई।
पेंशन बंद होते ही बढ़ी बुजुर्गों की परेशानी
पेंशन बंद होने के बाद बुजुर्गों के सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। दवा, भोजन और दैनिक आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह पेंशन पर निर्भर इन वृद्धजनों को अब अपने जिंदा होने का प्रमाण लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर भौतिक सत्यापन किया गया होता तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। लोगों ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई और बुजुर्गों की पेंशन तत्काल बहाल करने की मांग की है।
सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की निगरानी प्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही सरकारी योजनाओं के उद्देश्य को कमजोर करती है और बुजुर्गों के मानवीय अधिकारों का उल्लंघन है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
पीड़ित बुजुर्गों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच कराई जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और सभी प्रभावित बुजुर्गों की पेंशन अविलंब पुनः चालू की जाए।
