गयाजी में ई-रिक्शा चालक के खाते में दिखे 759 करोड़ रुपये, बैंक बंद होने से रहस्य बरकरार
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 12 जुलाई 2026,
गयाजी: शहर के बागेश्वरी मोहल्ला निवासी एक ई-रिक्शा चालक के बैंक खाते में 759 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दिखाई देने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद ई-रिक्शा चालक शिव कुमार पटेल और उनका परिवार असमंजस और चिंता में है। रविवार को बैंक बंद रहने के कारण यह स्पष्ट नहीं हो सका कि खाते में इतनी बड़ी राशि कैसे दिखाई दी और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या है।
पेंशन के 1100 रुपये निकालने पहुंचे थे सीएसपी
शिव कुमार पटेल ने बताया कि वह अपनी पेंशन के ₹1100 निकालने के लिए एक सीएसपी (Customer Service Point) पहुंचे थे। पैसे निकालने के बाद जब उन्होंने खाते का बैलेंस चेक कराया तो उसमें 759 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दिखाई दी। बैलेंस देखते ही वह हैरान रह गए।
पुलिस और साइबर थाना ने की पूछताछ
शिव कुमार पटेल के अनुसार, सबसे पहले डेल्हा थाना क्षेत्र के छोटकी नवादा टीओपी के पुलिस पदाधिकारी उनके घर पहुंचे और उन्हें डेल्हा थाना बुलाया गया, जहां उनका बयान दर्ज किया गया। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें साइबर थाना भेजा गया, जहां भी अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की।
परिवार में बढ़ी चिंता, दिनभर लगा रहा लोगों का तांता
घटना की जानकारी फैलते ही शिव कुमार पटेल के घर पर मीडिया कर्मियों और स्थानीय लोगों का आना-जाना लगा रहा। वहीं, बाहर रहने वाले रिश्तेदारों और परिचितों के लगातार फोन आने लगे। उन्होंने बताया कि बार-बार पूरी घटना बतानी पड़ रही है, जिससे पूरा परिवार मानसिक तनाव में है।
सोमवार को बैंक खुलने के बाद हो सकता है खुलासा
रविवार को बैंक बंद होने के कारण बैंक प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह तकनीकी त्रुटि, किसी गलत ट्रांजेक्शन का परिणाम है या फिर कोई अन्य कारण। अब सभी की निगाहें सोमवार पर टिकी हैं, जब बैंक खुलने के बाद इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
शहर में चर्चा का विषय बना मामला
एक सामान्य ई-रिक्शा चालक के खाते में सैकड़ों करोड़ रुपये दिखाई देने की खबर पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, अभी तक बैंक या संबंधित एजेंसियों की ओर से इस राशि की पुष्टि या कारण को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में मामले की वास्तविकता बैंक की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
