सीयूएसबी के वैज्ञानिक को बड़ी सफलता, डॉ. सप्तर्षि घोष को एएनआरएफ से मिला 64 लाख रुपये का शोध अनुदान

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 12 जून 2026,

गयाजी: सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (सीयूएसबी) के रसायन विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सप्तर्षि घोष को भारत सरकार की अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) से 64 लाख रुपये का शोध अनुदान प्राप्त हुआ है। यह अनुदान आनुवंशिक (जेनेटिक) रोगों के विरुद्ध नई चिकित्सीय रणनीतियों के विकास से जुड़े शोध कार्य के लिए प्रदान किया गया है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने दी बधाई

सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह एवं कुलसचिव प्रो. नरेंद्र कुमार राणा ने इस उपलब्धि पर डॉ. घोष को बधाई देते हुए इसे विश्वविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। वहीं भौतिक एवं रासायनिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. अतुल प्रताप सिंह सहित विभाग के अन्य प्राध्यापकों ने भी डॉ. घोष और उनकी शोध टीम की सराहना की।

न्यूक्लिक अम्लों की संरचनात्मक परिवर्तनशीलता पर होगा अध्ययन

जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि यह शोध अनुदान न्यूक्लिक अम्लों (डीएनए एवं आरएनए) की संरचनात्मक परिवर्तनशीलता का रासायनिक मॉड्यूलेटरों की सहायता से अध्ययन करने के लिए प्रदान किया गया है। तीन वर्षों की अवधि तक चलने वाली इस परियोजना में डॉ. घोष सीयूएसबी के बायोटेक्नोलॉजी एवं लाइफ साइंस विभागों के साथ सहयोगात्मक रूप से कार्य करेंगे।

कैंसर और तंत्रिका संबंधी रोगों पर केंद्रित होगा शोध

डॉ. सप्तर्षि घोष ने बताया कि कैंसर और न्यूरोडीजेनेरेटिव (तंत्रिका-अपक्षयी) रोगों जैसे कई आनुवंशिक रोग डीएनए एवं आरएनए की संरचना में होने वाले परिवर्तनों के कारण उत्पन्न होते हैं। प्रस्तावित शोध का उद्देश्य छोटे अणुओं और लिगैंड्स जैसे रासायनिक मॉड्यूलेटरों की सहायता से इन रोग-संबंधी संरचनात्मक परिवर्तनों को नियंत्रित करने की संभावनाओं का अध्ययन करना है।

शोध से बढ़ेगी सीयूएसबी की वैश्विक पहचान

डॉ. घोष ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से स्वदेशी ज्ञान-संपदा का विकास होगा तथा शोध निष्कर्षों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित किया जाएगा। इसके साथ ही शोध से प्राप्त नवाचारों को पेटेंट के रूप में संरक्षित करने की भी योजना है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह परियोजना जैव-भौतिकी और न्यूक्लिक अम्ल अनुसंधान के क्षेत्र में सीयूएसबी को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

शोध और नवाचार के क्षेत्र में नई उपलब्धि

विशेषज्ञों का मानना है कि यह अनुदान न केवल डॉ. घोष की वैज्ञानिक क्षमता की पहचान है, बल्कि सीयूएसबी में उच्चस्तरीय शोध एवं नवाचार को भी नई दिशा देगा। विश्वविद्यालय की यह उपलब्धि बिहार के शैक्षणिक एवं शोध जगत के लिए भी गौरव का विषय है।

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