समर कैंप में बच्चे सीख रहे बिहार, त्रिपुरा और बंगाल के लोकनृत्य, संस्कृति से हो रहे रूबरू

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 10 जून 2026,

गयाजी: बिहार बाल भवन किलकारी के गेवाल बिगहा परिसर में 1 जून से 20 जून तक आयोजित समर कैंप “चक धूम-धुम” बच्चों के लिए सीखने और रचनात्मक विकास का केंद्र बना हुआ है। कैंप में लगभग 100 बच्चे उत्साहपूर्वक भाग लेकर विभिन्न सांस्कृतिक एवं कलात्मक गतिविधियों का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

बिहार, त्रिपुरा और बंगाल के लोकनृत्यों का प्रशिक्षण

कैंप में नृत्य प्रशिक्षक गौतम कुमार गोलू बच्चों को बिहार का प्रसिद्ध झिझिया नृत्य, त्रिपुरा का पारंपरिक होजागिरी नृत्य तथा बंगाल का लोकनृत्य सिखा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को नृत्य की तकनीक के साथ-साथ इन राज्यों की संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन से भी परिचित कराया जा रहा है।

कला के साथ बढ़ रहा आत्मविश्वास और अनुशासन

विभिन्न आयु वर्ग के बच्चे एक साथ प्रशिक्षण लेकर अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं। लोकनृत्य के माध्यम से उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन, टीम भावना और सांस्कृतिक समझ का विकास हो रहा है। बच्चों का उत्साह और सीखने की ललक कैंप के माहौल को जीवंत बना रही है।

लोककलाओं के संरक्षण में बच्चों की भूमिका अहम

प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव एवं सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी आकाश कुमार ने बताया कि समर कैंप का उद्देश्य बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना और उनकी प्रतिभा को उचित मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन में बच्चों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सांस्कृतिक विरासत से जुड़ रहे बच्चे

नृत्य प्रशिक्षक गौतम कुमार गोलू ने कहा कि लोकनृत्य हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके माध्यम से बच्चों को देश की विविध संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन की जानकारी मिलती है। समर कैंप बच्चों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को समझने और उससे जुड़ने का अवसर प्रदान कर रहा है।

संगीत, चित्रकला और नाटक का भी मिल रहा प्रशिक्षण

समर कैंप में नृत्य के अलावा संगीत, चित्रकला, नाटक, क्राफ्ट एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार कैंप में बच्चों का पंजीकरण अभी भी जारी है और इच्छुक बच्चे 15 जून तक अपना नामांकन करा सकते हैं।

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