लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर गयाजी में निकली भव्य शोभायात्रा, विष्णुपद मंदिर के जीर्णोद्धार में योगदान को किया गया याद
आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 31 मई 2026,
गयाजी। रविवार को गयाजी में विष्णुपद मंदिर के जीर्णोद्धार कराने वाली लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती श्रद्धा, उत्साह और भव्यता के साथ मनाई गई। महारानी अहिल्याबाई होल्कर विचार मंच के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में माल्यार्पण, भव्य शोभायात्रा एवं विचार गोष्ठी के माध्यम से उनके अद्वितीय योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पंडा समाज के प्रतिनिधियों तथा गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया।
माल्यार्पण के बाद निकली भव्य शोभायात्रा
कार्यक्रम की शुरुआत विष्णुपद मंदिर परिसर स्थित महारानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद निकाली गई भव्य शोभायात्रा में मंच के पदाधिकारी, सदस्य, पंडा समाज के लोग एवं महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुईं। बैंड-बाजे की मधुर धुनों तथा “अहिल्याबाई होल्कर अमर रहें” और “अहिल्या महारानी की जय” के नारों से पूरा वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण बना रहा।
रथ पर सजी प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र
शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण रथ पर विराजमान महारानी अहिल्याबाई होल्कर की भव्य प्रतिमा रही, जो उनके साहस, नेतृत्व क्षमता और जनसेवा की भावना का प्रतीक बनी। यात्रा शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए सिजुआर भवन पहुंची, जहां विचार गोष्ठी एवं सभा का आयोजन किया गया। मार्ग में कई स्थानों पर स्थानीय नागरिकों एवं श्रद्धालुओं ने शोभायात्रा का स्वागत कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
सुशासन और जनकल्याण की मिसाल थीं अहिल्याबाई
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि महारानी अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास की उन विरल महिला शासकों में शामिल हैं, जिन्होंने अपने सुशासन, न्यायप्रियता और लोककल्याणकारी कार्यों से अमिट पहचान बनाई। 18वीं शताब्दी में मालवा राज्य की शासक रहीं अहिल्याबाई ने न केवल प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण में भी ऐतिहासिक भूमिका निभाई।
विष्णुपद मंदिर के पुनर्निर्माण में निभाई ऐतिहासिक भूमिका
वक्ताओं ने कहा कि देशभर में काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर, केदारनाथ धाम सहित अनेक धार्मिक स्थलों के विकास और पुनर्निर्माण में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। गयाजी के विश्वप्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर का वर्तमान स्वरूप भी उनके प्रयासों का परिणाम है। वर्ष 1787 में उनके संरक्षण में मंदिर का भव्य पुनर्निर्माण कराया गया था, जिसके कारण आज भी गयाजी की जनता उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण करती है।
नारी सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता की प्रेरणा
सभा में वक्ताओं ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर केवल एक शासक नहीं, बल्कि नारी सशक्तिकरण, धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक समरसता और जनसेवा की जीवंत मिसाल थीं। उन्होंने अपने शासनकाल में मंदिरों, घाटों, धर्मशालाओं, कुओं और जलाशयों का निर्माण कर समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए कार्य किया। उनका जीवन आज भी युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
नई पीढ़ी तक पहुंचाए जाएंगे अहिल्याबाई के आदर्श
मंच के सचिव काशीनाथ प्रसाद ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य महारानी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, उनके आदर्शों और समाज के प्रति उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है, ताकि युवा वर्ग उनके विचारों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र और समाज निर्माण में अपनी भूमिका निभा सके।
समाजहित में कार्य करने का लिया संकल्प
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के आदर्शों को आत्मसात करने तथा समाजहित में कार्य करने का सामूहिक संकल्प भी लिया। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में अहिल्याबाई के सुशासन, सेवा और संवेदनशील नेतृत्व की भावना को अपनाने की आवश्यकता है।
बड़ी संख्या में गणमान्य लोग रहे उपस्थित
इस अवसर पर वार्ड पार्षद सारिका कुमारी, मंच के सचिव काशीनाथ प्रसाद, उपाध्यक्ष टिब्लू सिंह, डॉ. सुदर्शन शर्मा, डॉ. उमाशंकर सिंह, डॉ. जितेंद्र कुमार, बेबी कुमारी, मणिलाल बारिक, विनोद लाल मेहरवार, केशव मेहरवार, प्रेमनाथ टईया, रतन गायव, रामकुमार बारिक, सीमा सिन्हा, सरिता त्रिपाठी, मुन्नी देवी, अर्पणा मिश्रा, अश्वनी कुमार सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
