एससी-एसटी अत्याचार पीड़ितों को बड़ी राहत, 76 लाभुकों के लिए 27.86 लाख रुपये मुआवजा स्वीकृत

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आर्यावर्त वाणी | गयाजी | 15 मई 2026,

गयाजी: शुक्रवार को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत पीड़ितों को राहत पहुंचाने की दिशा में गयाजी जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने 76 पीड़ित लाभुकों के लिए कुल 27,86,250 रुपये मुआवजा राशि स्वीकृत करने का आदेश जारी किया है।

75 मामलों में प्रथम किस्त, एक मामले में द्वितीय किस्त स्वीकृत

जिला प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार गयाजी जिले के विभिन्न थानों से प्राप्त प्राथमिकी एवं आरोप पत्रों के आधार पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत यह कार्रवाई की गई है। स्वीकृत मामलों में 75 पीड़ितों को प्रथम किस्त के रूप में कुल 26,86,250 रुपये तथा एक मामले में द्वितीय किस्त के रूप में 1 लाख रुपये भुगतान की स्वीकृति प्रदान की गई है।

डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में भेजी जाएगी राशि

जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के लोगों को अत्याचार से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से यह अधिनियम प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इसके तहत राहत अनुदान की राशि पीड़ितों के आधार से जुड़े बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाती है।

विभिन्न अपराधों के लिए निर्धारित है अलग-अलग मुआवजा

प्रशासन के अनुसार गाली-गलौज एवं जातिसूचक अपमान से जुड़े मामलों में धारा 3(1)(r)(s) के तहत कुल 1 लाख रुपये राहत राशि निर्धारित है। इसमें प्राथमिकी दर्ज होने पर 25 हजार रुपये, आरोप पत्र दाखिल होने पर 50 हजार रुपये तथा दोष सिद्ध होने के बाद शेष 25 हजार रुपये दिए जाते हैं।
मारपीट एवं गंभीर चोट से जुड़े मामलों में धारा 3(2)(va) के तहत कुल 2 लाख रुपये मुआवजा का प्रावधान है। इसमें एफआईआर के बाद 50 हजार रुपये, चार्जशीट दाखिल होने पर 1 लाख रुपये तथा दोष सिद्ध होने पर 50 हजार रुपये भुगतान किया जाता है।

बलात्कार और हत्या के मामलों में अधिक राहत राशि

बलात्कार एवं सामूहिक बलात्कार के मामलों में क्रमशः 5 लाख और 8.25 लाख रुपये राहत राशि निर्धारित की गई है। वहीं हत्या या मृत्यु के मामलों में 8.25 लाख रुपये तक सहायता राशि देने का प्रावधान है। इसके अलावा पीड़ित परिवार को प्रतिमाह पेंशन, महंगाई भत्ता तथा न्यायालय में आरोप गठन के बाद परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का भी प्रावधान किया गया है।

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